भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड

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ब्यास परियोजना

ब्‍यास परियोजना का विकासात्‍मक इतिहास

ब्‍यास परियोजना में दो इकाइयॉ नामत: यूनिट-I-बीएसएल परियोजना तथा यूनिट-II-ब्‍यास बांध परियोजना सम्मिलित है ब्‍यास परियोजना, सिंचाई एवं विद्युत उत्‍पादन के लिए तीन पूर्वी नदियों नामत: सतलुज, ब्‍यास तथा रावी के जलों का एकीकृत तरीके से उपयोग करने के लिए महायोजना (मास्‍टर प्‍लान) का एक भाग है। भाखड़ा-नंगल परियोजना के पूर्ण होने से सतलुज के जल (औसत बहाव 16,652 मिलियन सी.यू.एम. या 13.5 मिलियन-एकड फुट) को पूर्ण रूप से उपयोग में लगाया गया। वर्तमान माधोपुर–ब्‍यास लिंक, जो रावी के जल औसत 2344 मिलियन सी.यू.एम. (0.9 मिलियन एकड़ फुट) को ब्‍यास की और स्‍थानान्‍तरित करता है, की सहायता से भारत पौंग में ब्‍यास डैम भाखड़ा बांध के साथ मिलकर तीन पूर्वी नदियों के लगभग 92% औसत अन्‍तर्वाह का उपयोग कर सका है। ब्‍यास सतलुज लिंक परियोजना के पूर्ण होने से आंकडे आगे 97% तक बढ़ गए हैं।

ब्‍यास निर्माण बोर्ड

भाखड़ा बांध पर प्रारम्‍भ की गई विभागीय निर्माण एजेन्‍सी को ब्‍यास बांध के निर्माण हेतु भी अपनाया गया था। पंजाब सरकार ने परियोजना के निर्माण से सम्‍बन्धित सभी मामलों पर कुशल तकनीकी एवं वित्‍तीय नियन्‍त्रण रखने के लिए 1961 में ब्‍यास नियन्‍त्रण बोर्ड का गठन किया। 1966 में पंजाब के पुनर्गठन के परिणामस्‍वरूप भागीदार राज्‍यों की तरफ से परियोजना का कार्यन्‍वयन भारत सरकार को सौंपा गया जिसने नियन्‍त्रण बोर्ड का पुनर्गठन किया और इसे भाखड़ा निर्माण बोर्ड (बीसीबी) का नाम दिया।

केन्‍द्रीय ऊर्जा मन्‍त्री की अध्‍यक्षता में ब्‍यास निर्माण बोर्ड में पूर्ण-कालिक सचिव, मुख्‍यालय, नई दिल्‍ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्‍थान तथा हिमाचल प्रदेश के मुख्‍य मंत्री, पंजाब, हरियाणा, राजस्‍थान तथा हिमाचल प्रदेश प्रत्‍येक राज्‍य से एक मन्‍त्री, उप मन्‍त्री, ऊर्जा एवं सिंचाई, भारत सरकार, सचिव, विद्युत विभाग, ऊर्जा मन्‍त्रालय, भारत सरकार सचिव, कृषि एवं सिंचाई मन्‍त्रालय, भारत सरकार अध्‍यक्ष, भाखड़ा और ब्‍यास प्रबन्‍ध बोर्ड अध्‍यक्ष, केन्‍द्रीय जल आयोग सदस्‍य (जल विद्युत) केन्‍द्रीय विद्युत प्राधिकरण संयुक्‍त सचिव, ऊर्जा मन्‍त्रालय, भारत सरकार वि‍त्तीय सलाहकार एवं संयुक्‍त सचिव, विद्युत विभाग, ऊर्जा मन्‍त्रालय, भारत सरकार सचिव, सिंचाई एवं विद्युत, पंजाब, हरियाणा और राजस्‍थान, सचिव, वित्त, पंजाब, हरियाणा तथा राजस्‍थान, सचिव, उपनिवेशन और राजस्‍व, राजस्‍थान, वित्‍तीय आयुक्‍त एवं सचिव, राजस्‍व विभाग, हिमाचल प्रदेश, अध्‍यक्ष राज्‍य बिजली बोर्ड, पंजाब, हरियाणा और राजस्‍थान तथा हिमाचल प्रदेश, महाप्रबन्‍धक, ब्‍यास परियोजना, वित्‍तीय सलाहकार एवं मुख्‍य लेखा अधिकारी, ब्‍यास परियोजना, मुख्‍य अभियन्‍ता, सिंचाई वर्क्‍स, पंजाब एवं हरियाणा , मुख्‍य अभियन्‍ता विद्युत (विद्युत केन्‍द्र और पारेषण) ब्‍यास परियोजना तथा मुख्‍य अभियन्‍ता, राजस्‍थान नहर परियोजना सम्मिलित है। डॉ. ए. एन. खोसला की अध्‍यक्षता में ब्‍यास परियोजना के लिए बोर्ड ऑफ कन्‍सलटैन्‍टस का गठन किया गया जिसमें देश तथा बाहर के कुछ विख्‍यात तथा अनुभवी सम्मिलित थे। यूनाईटिड स्‍टेटस ब्‍यूरो ऑफ रिक्‍लेमेशन (यू.एस.बी.आर.) से सलाह लेने के उपरान्‍त विभिन्‍न विकल्‍पों का विस्‍तृत एवं व्‍यवस्थित अध्‍ययन करके वर्तमान स्‍कीम धीरे-धीरे विकसित हुई थी।

ब्यास परियोजना यनिट-1

ब्यास सतलुज लिंक परियोजना

ब्यास नदी के आंशिक जल को 2 सुरंगों और एक खुली चैनल के माध्यम से सतलुज नदी में डाइवर्ट करने और भाखड़ा जलाशय (गोबिंद सागर) की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए एक प्रतिभाशाली इंजीनियर और अपने व्यवसाय के ऊर्जस्वी लीडर और जवाहरलाल नेहरू के नजदीकी विश्वास पात्र डॉ. ए.एन. खोसला ने ब्यास सतलुज लिंक की परिकल्पना की थी।

ब्यास सतलुज लिंक परियोजना के लिए आरंभिक जांच 1956 में आरम्भ हुआ था, जिसके परिणास्वरूप पंजाब सिंचाई शाखा के परियोजना संगठन द्वारा नवम्बर 1957 में आरम्भिक परियोजना तैयार की गई।

1957 की परियोजना रिपोर्ट

पंजाब सिंचाई के परियोजना परिमण्डल द्वारा 1956 में जांच कार्य शुरू किया गया और सिंचाई शाखा के परियोजना प्रशासन द्वारा तद्नुसार नवम्बर, 1957 में दक्षिणी पंजाब को सिंचाई उपलब्ध कराने के सीमित प्रयोजन के साथ एक परियोजना रिपोर्ट तैयार की गई। इस परियोजना का ध्येय बड़ी परियोजना के प्रथम चरण का निमार्ण करना था, जिसके अन्तिम चरण में लारजी में ब्यास नदी पर 213.36 मीटर (700 फीट) ऊंचे बांध के निर्माण की परिकल्पना की गई थी। सम्पूर्ण योजना तीन चरणों में पूरी की जानी थी।

1957 की परियोजना में 254.85 क्यूमेक क्षमता के लिंक का विचार किया गया था जिसके निम्नलिखित घटक थे।

  • पण्डोह में डाइवर्जन बांध
  • पण्डोह से रिगार तक 11.26 कि.मी लम्बी सुरंग
  • रिगार से सुन्दरनगर तक 19.31 कि.मी. लम्बी खुली  चैनल
  • मालिंदी गांव के निकट सुन्दरनगर से एलसेद खड्ड तक 4.824 लम्बी सुरंग

दूसरे चरण में सुन्दरनगर से अलसेद खड्ड तक की सुरंग को सतलुज नदी के दाहिने किनारे पर स्थित विद्युत संयंत्र तक विस्तार देने का प्रस्ताव किया गया। इस चरण में बिजली घर का निर्माण भी किया जाना था। अन्तिम चरण में लारजी में बांध के निर्माण का प्रस्ताव किया गया था। तथापि लारजी में 213.86 (700 फीट) ऊंचे बांध का निर्माण इसकी तकनीकी एवं वित्तीय व्यवहार्यता के अधीनस्थ था।

1960 की परियोजना रिपोर्ट

ब्यास सतलुज लिंक के लिए एक और प्रस्ताव जनवरी, 1960 में तैयार किया गया था। इस प्रस्ताव में निम्नलिखित परिकल्पना की गई थीः

  • मण्डी नगर के लगभग 6.43 कि.मी. (4 मील) अपस्ट्रीम, उह्ल नदी के संगम के ठीक नीचे ब्यास नदी पर 131.06 मीटर (430 फीट) ऊंचा कंक्रीट आर्क बांध
  • सुकेती जलाश्य में 849.5 क्यूमेक्स की निकासी की कुल क्षमता हेतु 7 कि.मी. लम्बी जुडवां डाइवर्जन सुरंग
  • सुकेती घाटी में एक जलाश्य की रचना करने के लिए सुकेती पर 134.11 मीटर (440 फीट) ऊंचा मिट्टी का बांध
  • सुकेती जलाश्य के दक्षिणी छोर से सतलुज नदी पर विद्युत संयंत्र तक 14.966 लम्बी जुडवां विद्युत सुरंगें
  • सतलुज नदी के दाएं किनारे पर 1200 मेगावाट की अधिष्ठापित क्षमता का विद्युत संयंत्र। इस योजना में सतलुज विद्युत संयंत्र पर 100 प्रतिशत लोड फैक्टर पर 625 मेगावाट की सुनिश्चित विद्युत और भाखड़ा जलाशय से दक्षिणी पंजाब की अतिरिक्त सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने के अलावा, सुकेती जलाशय में 3080 मीलियन घन मीटर (2.5 मिलियन एकड फीट) की सक्रिय भण्डारण क्षमता विकसित करने की संभाव्यता थी।

प्रस्तावित सुकेती जलाशय ने बाल्ह घाटी में लगभग 9308 हैक्टेयर (23000 एकड़) कवर होना था और हिमाचल प्रदेश सरकार का दृष्टिकोण इसके डूब क्षेत्र के तथ्य के पक्ष में नहीं था। तथापि इस योजना को त्याग दिया गया क्योंकि उपलब्ध आंकड़ों से भूकंप क्षेत्र में 134.11 मीटर (440 फीट) ऊंचे बांध की व्यवहारिता उचित रूप से स्थापित नहीं की जा सकी। आगे के अध्ययनों में यह संकेत मिला कि 1233 मिलियन क्यूबिक मीटर (1.0 x 106 एकड़ फीट) के सक्रिय भण्डारण के साथ 99.06 मीटर (325 फीट) ऊंचाई के बांध से केवल 6475 हैक्टेयर (16000 एकड़) क्षेत्र डूबेगा और इसके बावजूद भी इसमें काफी विद्युत संभाव्यता बनी रहेगी। इसके अतिरिक्त इस ऊंचाई के एक रॉकफिल बांध का निर्माण करना व्यवहार्य माना गया। किन्तु बाल्ह घाटी के डूब क्षेत्र के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की आपत्ति के कारण, इस योजना को भी अस्थगित रखा गया।

1961 की परियोजना रिपोर्ट

पैरा 3.1.1 और 3.1.2 में वर्णित समस्याओं में सुकेती घाटी में बिना किसी जलाशय ब्यास से सतलुज नदी के सीधे लिंक की आवश्यकता का संकेत दिया, ताकि तत्कालीन पंजाब (अब पंजाब और हरियाणा) की तात्कालिक सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके और भाखड़ा, पौंग तथा सतलुज विद्युत संयंत्रों में इष्टतम विद्युत संम्भाव्यता विकसित की जा सके। इन विद्युत संयंत्रों ने एक ग्रिड के रूप में कार्य करते हुए कुल 733 मेगावाट की सुनिश्चित विद्युत उपलब्ध कराई होती।

कुल  मिलाकर ऐााó स्कीम से सुकेती घाटी को जलमग्न किए बिना ब्यास नदी के पानी को सतलुज नदी में डाइवर्ट करने के लिए सर्वोत्तम कार्य संयोजन प्राप्त हुआ। इसे दो चरणों में पूरा करने का प्रस्ताव था। प्रथम चरण में बुमका/भरारी लिंक तक कार्य किया जाना था, इस प्रकार ब्यास के पानी को अलसेद/भरारी खड्ड के माध्यम से भाखड़ा जलाशय से अतिरिक्त सिंचाई एवं विद्युत के लिए सतलुज नदी में ले जाना था। द्वितीय चरण में सुन्दर नगर सतलुज सुरंग तथा ब्यास सतलुज लिंक के अन्तिम सिरे पर उपलब्ध 304.8 मीटर (1000 फीट) के ढलान से अतिरिक्त विद्युत हेतु सतलुज विद्युत संयंत्र को पूरा करने की व्यवस्था थी।

इस योजना की मुख्य विशेष निम्नलिखित थीः

  • मण्डी नगर के 13.00 कि.मी. अपस्ट्रीम नदी तल के ऊपर 42.67 मीटर (140 फीट) का स्ट्रेट ग्रेविटी टाइप कंक्रीट डाइवर्जन बांध।
  • 254.85 क्यूमेक्स की अभिकल्पित क्षमता हेतु 7.62 मीटर व्यास की 12.84 कि.मी. पण्डोह बग्गी सुरंग।
  • हेड रीच में 254.85 क्यूमेक्स और शेष रीच में 233.62 क्यूमेक्स की क्षमता के साथ 11.59 कि.मी. लम्बी हाइडल चैनल के अन्तिम छोर पर अथवा बुमका नाला में 6.165 मिलियन क्यूबिक मीटर (5000 एकड़ फीट) क्षमता का बैलेंसिंग रिजर्वाय
  • 212.376 क्यूमेक्स (7500 क्यूजेक्स) की अभिकल्पित निकासी हेतु 8.53 मीटर व्यास की 13.68 कि.मी. सुन्दरनगर सतलुज सुरंग
  • बुमका/भरारी बायपास लिंक
  • 7.62 मीटर व्यास के आंन्तिरक राइजर सहित 21.95 मीटर व्यास का 76.2 मीटर ऊंचा डिफरेंशियल प्रकार का सर्ज शॉफ्ट
  • सतलुज नदी की दाईंं ओर 636 मेगावाट (106 मेगावाट प्रत्येक की 6 युनिटें) की अधिष्ठापित क्षमता का सतलुज विद्युत संयंत्र ।

 

अन्तिम परियोजना प्रस्ताव

निर्माण हेतु अपनाए गए अन्तिम योजना प्रस्ताव की मुख्य विशेषताएं निम्नानुसार हःं

  • पण्डोह बांधः पण्डोह में 76.25 मीटर (250 फीट) ऊंचा अर्थ-कम-रॉक फिल प्रकार का डावर्जन बांध
  • पण्डोह स्पिलवेः 896.417 मीटर  (2941फीट) के अधितक जलाश्य स्तर पर 9939 क्यूमेक्स (351000 क्यूजेक्स) की निकासी क्षमता वाला ऑरिफिस टाइप गेटेड शूट स्पिलवे और इसके डाऊनस्ट्रीम सिरे पर फ्लिप बकेट प्रकार का इनर्जी डिसिपेटर
  • पण्डोह बग्गी सुरंगः 254.85 क्यूमेक्स की अभिकल्पित क्षमता सहित 7.62 मीटर फिनिशड व्यास की 13.11 कि.मी. लम्बी सुरंग।
  • सुन्दरनगर हाइडल चैनलः 11.80 कि.मी. लम्बी हाइडल चैनल।
  • सुन्दरनगर बैलेंसिंग रिजर्वायरः सुन्दरनगर के निकट 3.7 मिलियन क्यूबिक मीटर क्षमता का बैलेंसिंग भण्डार
  • सुन्दरनगर सतलुज सुरंगः 403.52 क्यूमेक्स की अभिकल्पित क्षमता सहित 8.53 मीटर फिनिशड व्यास की 12.35 कि.मी. लम्बी विद्युत सुरंग।
  • सर्ज शॉफ्टः 22.86 मीटर का मेन शॉफ्ट, 7.62 मीटर व्यास के राइजर वाला 125 मीटर ऊंचा सर्ज शॉफ्ट
  • देहर बाइपासः 6.71 मीटर फिनिशड व्यास की 296.8 मीटर लम्बी बाइपास सुरंग, इसके बाद 212.376 क्यूमेक्स की अभिकल्पित निकासी क्षमता वाली 533.4 मीटर लम्बी शूट।
  • देहर पेनस्टॉक्सः 4.877 मीटर व्यास के 3 पेनस्टॉक हेडर और प्रत्येक हैडर 3.353 मीटर व्यास की 2 शाखाओं में द्विशाखित
  • देहर विद्युत संयंत्रः सतलुज नदी के दाएं किनारे पर 990 मेगावाट अर्थात् 165 मेगावाट प्रत्येक की 6 युनिटों सहित एक विद्युत संयंत्र।

 

ब्यास परियोजना II ब्यास बांध परियाजना

पौंग में ब्यास नदी पर एक भण्डार बांध के लिए सर्वप्रथम 1926 में पंजाब पीडब्ल्यूडी सिंचाई शाखा के श्री सी.ई. ब्लैकर ने विचार किया था। 1927 में पंजाब सरकार द्वारा पंजाब की नदियों एवं उनकी सहायक नदियों के अतिरिक्त जल के भण्डारण की संभावनाओं के संबंध में रिपोर्ट देने के लिए श्री ए.जे. विली, परामर्शी इंजीनियर, यूनाइटेड स्टेटस ब्यूरो और रिक्लेमेशन के नेतृत्व में डॉ. पी.एस. पिनफोल्ड, मुख्य भू-गर्भ शास्त्राó, एटौक ऑयल कम्पनी तथा श्री डब्ल्यूएच निकोल्सन, अधीक्षण अभियन्ता, पंजाब सिंचाई शाखा की एक समिति  नियुक्त की गई थी। समिति ने श्री ब्लैकर की रिपोर्ट के आधार पर सिफारिश की थी कि उस स्थान पर संभावित अत्यधिक बाढ़ आने के मद्देनजर एक किफाइती भण्डार की व्यवस्था करना कठिन होगा। समिति का यह भी मत था कि नरम, यद्यपि एक समान नींव के बज़री तथा कंकड का तटबंध सर्वाधिक व्यावहारिक होगा।

1955 की  परियोजना रिपोर्ट

1955 में ब्यास पर भण्डार के प्रति रुचि पुनः उत्पन्न हुई। तदनुसार भूगर्भीय, जलवैज्ञानिक, सामग्री एवं अन्य अन्वेषण किए गए, परिणामस्वरूप ब्यास बांध परियोजना के संबंध में आरम्भिक रिपोर्ट तैयार हुई। इस रिपोर्ट में, 6764 मिलियन क्यूबिक मीटर की सक्रिय भण्डार क्षमता और 925 मिलियन क्यूबिक मीटर की निष्क्रिय भण्डार क्षमता वाले मिट्टी के बांध का प्रस्ताव किया गया था। इस बांध की परिकल्पना कंक्रीट स्पिलवे खंड सहित एक अर्थ-कम-रॉकफिल संरचना के रूप में की गई थी। इस प्रारंभिक रिपोर्ट में विद्युत उत्पादन पर विचार नहीं किया गया था। तथापि, परियोजना की विद्युत संभाव्यता अविवादित थी।

1959 की परियोजना रिपोर्ट

बाद में, आगे अन्वेषण करने के बाद 1959 में पौंग में ब्यास बांध के लिए और अधिक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई और पंजाब सरकार को प्रस्तुत की गई। इस रिपोर्ट में, नदी तल स्तर के ऊपर एक 100.6 मीटर ऊंचे अर्थ-कम-रॉकफिल बांध, साथ ही ओवरफ्लो स्पिलवे सहित, एक हॉलो बटरेस टाइप कंक्रीट बांध का प्रस्ताव किया गया था। उस चरण में विद्युत उत्पादन की परिकल्पना नहीं की गई थी, हालांकि कंक्रीट बांध के गैर-ओवरफ्लो खंड में दो पावर पेनस्टॉक्स स्थापित करने का प्रावधान किया गया था।

परियोजना का अंतिम प्रस्ताव

1959 की परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के पश्चात्, भूगर्भीय अन्वेषण, सामग्रियों की जांच, प्राथमिक डिजाइन तैयार करने, कार्य के लिए प्रासंगिक विभिन्न प्रकार के लेआउट के आर्थिक पक्ष की तुलना करने आदि पर काफी कार्य किया गया। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने में डॉ. ए. एन. खोसला की अध्यक्षता में देश-विदेश के कुछ जाने-माने इंजीनियरों के परामर्शी बोर्ड ने अपना योगदान दिया। परियोजना की विभिन्न विशेषताओं पर यूनाइटेड स्टेट्स ब्यूरो ऑफ रिक्लेमेशन की सलाह भी मांगी गई। डिज़ाइनों में सहायता के  रूप में केन्द्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केन्द्र, पुणे और सिंचाई एवं विद्युत अनुसंधान संस्थान, अमृतसर में अनेक हाइड्रॉलिक मॉडल परीक्षण किए गए। विभिन्न विकल्पों के विस्तृत एवं प्रणालीबद्ध अध्ययन के माध्यम से धीरे-धीरे अंतिम योजना विकसित की गई।

निर्माण हेतु अपनायी गई अंतिम योजना प्रस्ताव की विशेषताएं निम्नानुसार हःं-

  • बांधः सबसे गहरे नींव स्तर के 132.59 मीटर(435 फीट) ऊपर और सबसे गहरे नदी तल से 100.58 मीटर (330 फीट) ऊपर एक अर्थ-कोर-कम-ग्रैवेल शेल बांध है। पौंग में ब्यास बांध
  • डायवर्ज़न कार्यः बांध के निर्माण में पांच सीमेंट कंक्रीट लाइन्ड सुरंगों के माध्यम से नदी का डायवर्जन शामिल है, जिन्हें बायीं से दायीं ओर टी1, टी2, पी1, पी2 एवं पी3 नाम दिया गया है। इनमें से प्रत्येक सुरंग का फिनिश्ड व्यास 9.14 मीटर (30 फीट) है और इनकी कुल लम्बाई 5016.7 मीटर है।
  • आउटलेट कार्यः ईएल 374.90 मीटर पर बेंच पर ट्रैशरैक संरचनाओं आदि सहित स्थायी इंटेक की व्यवस्था की गई है। द्वार सामान्यतया ईएल 343.66 पर कंट्रोल चैम्बर फ्लोर से प्रचालित किए जाते हैं और आपातकालीन स्थिति में इन्हें ईएल 435.86 के ऊपर स्थित हॉयस्ट हाउस से भी प्रचालित किया जा सकता है। प्रत्येक कंट्रोल चैम्बर एक वर्टिकल शाफ्ट द्वारा हॉयस्ट हाउस से जुड़ा हुआ है।
  • पेनस्टॉक कार्यः तीनों पेनस्टॉक सुरंगों पी1, पी2 तथा पी3 में से प्रत्येक एक 150 टन क्षमता के हाइड्रोलिक हॉयस्ट द्वारा प्रचालित 3.048 x 6.401 मीटर (10 x 21 फीट) के फिक्स्ड व्हील टाइप आपातकालीन द्वार से लैस हैं। ये द्वार बांध के शीर्ष पर स्थित हॉयस्ट संरचनाओं से प्रचालित किए जाते हैं, जो सुरंगों से वर्टिकल शाफ्ट द्वारा जुड़े हुए हैं। आपातकालीन द्वारों के डाउनस्ट्रीम, 9.14 मीटर व्यास की प्रत्येक सुरंग में 7280 एमएम आंतरिक व्यास के स्टील पेनस्टॉक लगाए गए हैं। प्रत्येक पेनस्टॉक शाखा के डाउनस्ट्रीम छोर पर बटरफ्लाई वॉल्व उपलब्ध कराए गए हैं।
  • स्पिलवेः बाएं आधार पर अधिकतम बाढ़ स्तर ईएल 433.121 मीटर पर लगभग 12375 क्यूमेक्स (437000 क्सूज़ेक्स) की निकासी क्षमता का एक ओवरफ्लो टाइप, द्वारयुक्त शूट स्पिलवे उपलब्ध कराया गया है। ब्यास बांध – स्पिलवे
  • पौंग विद्युत संयंत्रः  पौंग विद्युत संयंत्र (396 मेगावाट अर्थात् 6X66 मेगावाट) एक बहुमंजिली रि-इन्फोर्स्ड कंक्रीट फ्रेम्ड संरचना है जिसकी लम्बाई 143.04 मीटर, चौड़ाई 33.11 मीटर और ऊंचाई 43.48 मीटर है। यह पेनस्टॉक सुरंगों के डाउनस्ट्रीम स्टिलिंग बेसिन में स्थित है। पौंग बिजली घर
  • स्विच यार्डः 220 केवी स्विच-यार्ड इसके दायीं ओर विद्युत संयंत्र के निकट लगाया गया है। जनरेटर, उत्पादन वोल्टेज को 11 केवी से बढ़ा कर 220 केवी करने के लिए 3 फेज स्टेप-अप ट्रांसफार्मरों से जुड़ा है।

 

 

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