भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड

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कार्पोरेट कार्यालय

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बी.बी.एम.बी. का पूर्ण-कालिक अध्‍यक्ष और दो पूर्ण-कालिक सदस्‍यों अर्थात सदस्‍य (सिंचाई) तथा सदस्‍य (विद्युत) द्वारा बीबीएमबी का नेतृत्‍व किया जाता है, जो बीबीएमबी के क्रमश: सिंचाई एवं विद्युत खण्‍डों के मुखिया है । वित्‍तीय सलाहकार एवं मुख्‍य लेखा अधिकारी बोर्ड के वित्‍त एवं लेखा खण्‍ड के मुखिया हैं।

सचिव एवं विशेष सचिव बोर्ड के सामान्‍य कार्यों में बीबीएमबी के अध्‍यक्ष तथा पूर्ण-कालिक सदस्‍यों की मदद करते हैं।

  • डॉ. गुलाब सिंह नरवाल

    डॉ. गुलाब सिंह नरवाल सदस्‍य (सिंचाई)

    डॉ. गुलाब सिंह नरवाल

    डॉ. गुलाब सिंह नरवाल

    सदस्‍य (सिंचाई)

    डॉ. गुलाब सिंह नरवाल ने 27 मार्च 2019 को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में सदस्य सिंचाई का पद ग्रहण किया। इससे पहले, उन्हें मुख्य अभियंता, बीएसएल प्रोजेक्ट बीबीएमबी सुंदर नगर एचपी के पद पर नियुक्त किया गया था।इनका जन्म 03 मार्च 1969 को जिला हिसार हरियाणा में हुआ था। ये वर्ष 1998 में संघ लोक सेवा आयोग की अभियान्त्रिकी सेवाओं के समकक्ष परीक्षा द्वारा हरियाणा सिंचाई विभाग में अतिरिक्‍त कार्यकारी अभियन्‍ता, श्रेणी-1 के रूप में नियुक्‍त हुए। इन्‍हें वर्ष 1999 में कार्यकारी अभियंता, 2008 में अधीक्षण अभियन्‍ता और 2012 (मानी गई तिथि) में मुख्य अभियंता के रूप में पदोन्नत किया गया। इन्होंने राजकीय पोलीटेकनिक, झज्जर,  हरियाणा से उत्‍पादन अभियान्त्रिकी में डिप्लोमा, बीई (सिविल), बीई (अभियान्त्रिकी), एम.टेक (आईआईटी दिल्ली), एलएलबी, एलएलएम, एमबीए (ऑपरेशंस मैनेजमेंट), एम फिल (प्रबन्‍धन), एमएससी (पर्यावरण), एमएससी (कम्‍पयूटर सांईस), एमसीए, एमए (लोक प्रशासन), एमए (इतिहास) और पीएचडी (वनस्पति विज्ञान) किया। इन्‍हें सिंचाई और जल संसाधन परियोजनाओं में योजना, अभिकल्‍प और निर्माण का 21 वर्ष का अनुभव है। इन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 12 तकनीकी पत्र प्रस्तुत किए हैं तथा आईडब्‍लयूआरएम विषय पर वर्ष 2007 में सिंगापुर में भारत का प्रतिनिधित्व किया। ये 12 राष्ट्रीय इंजीनियरिंग संस्थानों/समिति के आजीवन सदस्य हैं। ये इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के फैलो सदस्‍य भी हैं। वे एफआईई एवं पीई धारक है।

     पैत्रिक विभाग में उपलब्धियां

            उन्हें विभाग में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 4 प्रशंसा पत्र दिए गए थे। पहली बार वर्ष 2005 में निदेशक राज्य सतर्कता ब्यूरो हरियाणा ने उनकी एक साल की तैनाती के दौरान सतर्कता जांचों   के निपटारे के संबंध में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया था। दूसरी बार वर्ष 2008 में एडीसी व सीईओ डीआरडीए कुरुक्षेत्र द्वारा सरस्वती परियोजना की योजना और निष्पादन के लिए सम्मानित किया गया था। दूर दराज लोगों के लिए पेयजल सुविधाएं प्रदान करने के लिए जिला भिवानी में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री (एमपीएचई) द्वारा वर्ष 2015 में तीसरी बार सम्‍मानित किया गया था। चौथा पुरस्‍कार वर्ष 2019 में कृषि मंत्री हि0प्र0 द्वारा स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, हिंदी को बढ़ावा देने और असाधारण शैक्षिक योग्यता प्राप्त करने के लिए प्रदान किया गया। अपने विशिष्ट कैरियर के दौरान वे नई ऊंचाइयों तक पहुंचे और लिफ्ट नहर इकाई, यमुना जल सेवा इकाई, भाखड़ा जल सेवा इकाई, निर्माण इकाई और सतर्कता इकाई जैसी कई परियोजनाओं की सेवा करके विभाग को अपना योगदान दिया। इस दौरान निद्रा को अधिमान न देकर रातों में छापे मारने के व्‍यक्तिगत प्रयासों से जांच करके पानी की चोरी रोकी। अपने व्यक्तिगत प्रयासों के कारण, पानी कमांड के अंतिम सिरे तक पहुंच सका। उन्हें भाखड़ा मेन लाइन, नरवाना शाखा, डब्ल्यूजेसी, समानांतर दिल्ली शाखा, कैरियर लाइन चैनल, सुंदर उप शाखा, लोहरु नहर और गुड़गांव नहर जैसी हरियाणा की प्रमुख नहरों के विनियमन और रखरखाव का भी अनुभव है। उन्होंने हथनी कुंड बैराज, ताजेवाला कॉम्प्लेक्स और कौशल्‍या डैम पर भी काम किया। उन्होंने यमुना नदी पर कई नदी प्रशिक्षण कार्यों को निष्पादित किया। उन्होंने डीवाटरिंग, बाढ़ नियंत्रण, सीएडीए (काडा), तालाब के विकास और लिफ्ट सिंचाई कार्यों को भी निष्पादित किया। उन्होंने गुजरात, मध्‍यप्रदेश, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों का दौरा करके किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया।

                   फील्‍ड में भरपूर अनुभव के कारण, वे राज्‍य स्‍तर की पर्यावरण, सहभागिता सिंचाई प्रबन्‍धन, राज्‍य जल नीति, एकीकृत जल संसाधन प्रबन्‍धन जैसी महत्‍वपूर्ण नीतियां बनाने एवं उनके कार्यान्‍वयन की रणनीतियों व उनके मूल्‍यांकन की योजनाओं में सक्रिय सहभागी रहे। विधि, सूचना तकनीकी (आईटी)    पर्यावरण एवं प्रबन्‍धन की शिक्षा ने उनके दृष्टिकोण  में एक नये आयाम जोड़ दिए और इसी कारण उन्‍हें जल संसाधन प्रबन्‍ध, अन्‍तर-राज्‍यीय जल सम्‍बन्‍धी मामलों, संविदाओं आदि से सबद्ध कानूनी पक्षों को समझने में मदद मिली है। उन्‍हें विश्‍व बैंक परियोजनाओं का व्‍यापक अनुभव प्राप्‍त है, क्‍योंकि उन्‍होंने हरियाणा जल संसाधन एकीकरण परियोजना (एसडब्‍लयूआरसीपी 1994-2001) में विश्‍व बैंक के कर्मियों के साथ मिलकर कार्य किया और विश्‍व बैंक की नीतियों, निगरानी, पर्यवेक्षण आदि की जानकारी प्राप्‍त की और विश्‍व बैंक के लिए राज्‍य के मुख्‍य विशेषज्ञ रहे।

    बीएसएल परियोजना, बीबीएमबी में उपलब्धियां

    1.       भाखड़ा ब्‍यास प्रबंध बोर्ड (बीबीएमबी) के दो सिंचाई इकाइयों सुन्‍दरनगर हि0प्र0 स्थित ब्‍यास सतलुज लिंक एवं ब्‍यास बांध पौंग को सिंचाई एवं विद्युत केन्‍द्रीय बोर्ड द्वारा पिछले 10 वर्षों से उत्‍कृष्‍ट अनुरक्षित परियोजनाओं की श्रेणी के अंतर्गत वर्ष 2019 के लिए जल विद्युत सैक्‍टर में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर के पुरस्‍कार से नवाजा गया। इन पुरस्‍कारों का आधार यह था कि इन परियोजनाओं में नवीनतम तकनीकी का उपयोग किया गया व हर समय सतर्कता बरती गई।
    2. (ए) 1986 से प्रत्‍येक वर्ष जलग्रहण क्षेत्र से पर्याप्‍त अंतरवाह रहने पर पंडोह जलाशय का फ्लशिंग ऑपरेशन किया जा रहा है। वर्ष 2018 के दौरान उपलब्‍ध डिस्‍चार्ज के एक लाख क्‍यूजेक्‍स से अधिक होने पर दो फ्लशिंग ऑपरेशंस किए गए (4811.20 + 9602.73) अर्थात 14413.93 एकड़ फीट गाद फलश् आउट की गई, जो 1986 के बाद से एक ऐतिहासिक आंकड़ा है।

            (बी) पंडोह बांध से फ्लशिंग और सुंदरनगर के बैलंसिंग रिसर्वायर से कचरे की सफाई एक साथ की गयी :- पंडोह बांध में उच्‍च अंतर्वहन की अवधि में फ्लशिंग करना एक वार्षिक कार्यकलाप है इस आपरेशन में बैलेसिंग रिसर्वायर सुंदरनगर में पानी का आगमन रोकना पड़ता है परिणाम डेहर पावर हाउस के विद्यत संयंत्र बंद हो जाते है, उसी प्रकार कचरे की सफाई करने के लिए पुंग ब्‍यास सतलुज लिंक, सुंदरनगर में पानी का प्रवेश रोकना होता है जिसके कारण बैलंसिंग रिसर्वायर का जल स्‍तर न्‍यूनतम स्‍तर पर पहुंच जाता है, इससे पूर्व पंडोह बांध की फ्लशिंग और कचरे की सफाई का कार्य अलग-2 किया जाता था जिससे डीपीएच से विद्युत उत्‍पादन की हानि होती थी, इस वर्ष 13 व 14 अगस्‍त 2018 को पंडोह बांध से फ्लशिंग और सुन्‍दरनगर के बैलंसिंग रिसर्वायर से कचरे की सफाई का काम एक साथ करने का निर्णय किया गया। इस संगठित कार्य से विद्युत उत्‍पादन में नगण्‍य कमी आयी क्‍योंकि विद्युत संयंत्रों को कम समय के लिये बंद रखना पड़ा जहां पहले तीन वर्षों में हर वर्ष औसतन 98.43 लाख युनिट विद्युत उत्‍पादन कम होती थी वहीं इस वर्ष मात्र 19.69 लाख युनिट हुई। यह कमी पंडोह बांध से फ्लशिंग और सुंदरनगर के बैलंसिंग रिसर्वायर से कचरे की सफाई एक साथ करने के कारण हुई और इस प्रकार यदि देखा जाये तो 118.12 लाख युनिट जिसकी राष्‍ट्रीय औसत विद्युत क्रय मूल्‍य (एपीपीसी) 3.53 के डब्‍ल्‍यू नोशनल मूल्‍य के आधार पर लगभग 417 लाख रूपये का वित्‍तीय लाभ एक साथ फ्लशिंग और ट्रेश कलीनिंग का कार्य करने से हुआ।

    1. इन्होंने वृक्षारोपण कार्यक्रमों, स्‍वच्‍छ भारत मिशन जैसी पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों के साथ-साथ बीबीएमबी कार्यालयों में राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने में गहरी रूचि ली जिसके लिए माननीय अध्यक्ष ने अपने दौरों के दौरान नोट में उनके प्रयासों की सराहना की।
    2. पिछले दो सत्रों के दौरान, ड्रेजिंग ऑपरेशन बिना किसी ब्रेक डाउन के बहुत ही कुशल और निर्बाध रहा है। संतुलन जलाशय में जमा गाद को न्यूनतम स्तर तक निकाल दिया गया था। ईंधन की खपत और मरम्मत शुल्क न्यूनतम रहा। इन्‍होने अनेक नये/स़ृजनात्‍मक/अभिनव कार्य किये, ताकि मानव शक्ति, मशीनरी और फ्लोटिंग वेसल्‍स की दक्षता में सुधार हो सके, साथ ही ये ड्रेजर न्यूनतम लागत पर चलाये जाएं। संतुलन जलाशय की ढलान को साफ़ करने के लिए ड्रेजरों को पहली बार गैर-ड्रेजिंग क्षेत्र में भी प्रचालित किया था।
    3. बाई-पास टनल के भीतर जमा गाद को बाहर निकालने के लिए 3 वर्ष के बाद दिनांक 20.11.2018 को बाई-पास शूट को प्रचालित किया गया। किसी आकस्मिकता की स्थिति में पूरी प्रणाली की जांच करने के लिए द्वारों का आवधिक प्रचालन अनिवार्य है।     
    4. सुंदर नगर हाइडल चैनल बीएसएल परियोजना की जीवन रेखा है। भराई पहुंचों में चार स्थानों पर बाहरी ढलान में दलदल हो गया था, ढलान को तुरंत मूल डिजाइन स्तर पर बहाल कर दिया गया था।
    5. अपने कार्यकाल के दौरान बीबीएमबी की भूमि पर किए गए अनधिकृत निर्माण एवं अतिक्रमण हटाए गए। उदाहरण के तौर पर विरोधों के बावजूद पण्‍डोह कॉलोनी से अनधिकृत शराब की दुकान हटाई गई।
    6. स्मार्ट कलास आरम्‍भ करने, क्‍लोज़ सर्किट टीवी कैमरे लगाने और बीबीएमबी स्कूलों में अंतर-यूनिट खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देने के पीछे ये एक महत्वपूर्ण प्ररेक शक्ति रहे हैं।  बीबीएमबी कर्मचारियों की प्रतिस्पर्धात्‍मक तीक्ष्‍णता को प्रोत्साहित करने के लिए बीएसएल परियोजना में अंतर-यूनिट वालीबाल टूर्नामेंट, अंतर-यूनिट शतरंज और बैडमिंटन टूर्नामेंट जैसी विभिन्न खेल गतिविधियों/कार्यक्रमों का आयोजन/संचालन भी किया गया है।
    7.  ड्रेजर पाइपों के फैब्रीकेशन के लिए आवश्‍यक सेल हार्ड स्‍टील की पिछले दस वर्षों से अधिक समय से खरीद नहीं की गई थी। इन्‍होंने व्यक्तिगत हस्तक्षेप किया और मेसर्स सेल के साथ समन्‍वय किया और लम्‍बे समय से लम्बित मामले को हल कर स्‍टील की खरीद की। अब बीबीएमबी के पास इस स्टील की इतनी मात्रा उपलब्ध है कि अगले 2-3 वर्ष तक नंगल कार्यशाला द्वारा ड्रेजर पाइपों का लगातार फैब्रीकेशन किया जा सकता है और बीएसएल परियोजना के पास इतने पाइप होगें जो कि कम से कम अगले 30 वर्ष के लिए पर्याप्‍त होंगे।   
    8. इन्होंने पण्‍डोह तथा सुन्‍दरनगर में स्थित बीबीएमबी जल निकायों को, विशेषकर दुर्गा पूजा और गणेश उत्‍सव जैसे त्‍यौहारों के दौरान प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाये।
    9. ये नि:शुल्‍क चिकित्‍सा शिविरों, रक्‍तदान शिविरों के साथ-साथ स्थानीय निकायों, शैक्षिक संस्थानों, वृद्धाश्रमों तथा अनाथालयों आदि के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करने जैसे समाज कल्याण कार्यक्रमों/क्रियाकलापों को आरम्‍भ करने के लिए निरन्‍तर सक्रिय रहे हैं।
    10. बीबीएमबी में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ज्ञान एवं कौशल वृद्धि के लिए इन्होंने वर्ष 2017 और 2018 में राष्‍ट्रीय जल अकादमी पुणे में ‘जल संसाधनों में महत्‍वपूर्ण मुद्दे’ और एकीकृत इंजीनियरिंग स्‍टाफ कालेज ऑफ इंडिया (ईएससीआई) हैदराबाद में ‘बांध सुरक्षा दिशा निदेश-बांधों की सुरक्षा के लिए निगरानी एवं संरक्षण उपाय’ से सम्‍बन्धित प्रशिक्षण में भाग लिया। उन्‍होनें बीबीएमबी द्वारा दिनांक  10-12 दिसम्‍बर, 2018 को चण्‍डीगढ़ में आयोजित स्‍थाई जल प्रबन्‍धन से संबंधित प्रथम अंतराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में भी भाग लिया।

       उनके अध्‍ययन के सशक्‍त क्षेत्र      

                   राष्‍ट्रीय जल मिशन (एनडब्‍ल्‍यूएम) के अन्‍तर्गत सिंचाई क्षेत्र में पानी के कुशल प्रयोग को बढ़ाना, जल संसाधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, जल संरक्षण, पानी की बर्बादी को कम करना और एकीकृत जल संसाधन प्रबन्‍ध (आईडब्‍ल्‍यूआरएम), राष्‍ट्रीय जल नीति 2012 के माध्‍यम से इसका अधिक न्‍यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना, वृहद् एवं मध्‍यम सिंचाई परियोजनाओं का विस्‍तार, नवीकरण एवं आधुनिकीकरण (ईआरएम), जल निकायों की मरम्‍मत, नवीकरण एवं बहाली (आरआरआर), त्‍वरित सिंचाई लाभ योजना (एआईबीपी), जल संसाधन में अनुसंधान एवं विकास, जल अधिकार, जल बाजार, गुणकारी जल, जल प्रशुल्‍क एवं मूल्‍य निर्धारण, वाटर फूटप्रिंट, सिंचाई क्षेत्र में पीपीपी, वाटर एटीएम, प्रदूषक द्वारा भुगतान, माइक्रो सिंचाई, अधिकतम सिंचाई नियत करना, सहभागी सिंचाई प्रबन्‍ध (पीआईएम), पर्यावरण प्रवाह, पर्यावरण प्रभाव मूल्‍यांकन और पर्यावरण निगरानी योजना, जल गुणवत्‍ता के पहलू, अन्‍तर-राज्‍यीय जल विवाद, जल विनियामक प्राधिकरण, नदी घाटी संगठन, एकीकृत नदी घाटी योजना एवं प्रबन्‍ध तथा यूनेस्‍को बहुल मानदंड विश्‍लेषण, राष्‍ट्रीय जल फ्रेमवर्क कानून/बिल, जल का संयुक्‍त प्रयोग, भू-जल विकास एवं प्रबन्‍ध, वर्षा जल संग्रहण, एचईसी-एचएमएस मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए जल-विज्ञान सम्‍बन्‍धी विश्‍लेषण, क्रॉपवाट तथा क्लिमवाट मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए सिंचाई जल प्रबन्‍ध, आईएसएआरईजी मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए मृदा जल संतुलन का अनुकरण, जल संसाधन तंत्र अभियांत्रिकी, जलवायु परिवर्तन, समस्‍थानिक जल विज्ञान, नवीन जल अवधारणा, जल का पुनर्चक्रण एवं पुन:प्रयोग, नदियों का अन्‍तर सम्‍पर्क, बीबीएमबी में जल का नियमन।

                   बांध सुरक्षा समिति तथा दिशा निर्देश, बांधों की सुरक्षा के लिए निगरानी एवं संरक्षण उपाय, बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी), अंतर्वाह अभिकल्‍प बाढ़ (आईडीएफ), संभावित अधिकतम बाढ़ (पीएमएफ) तथा स्पिलवे का क्षमता निर्धारण, डैमब्रेक अध्‍ययन, सैलाब मानचित्र, आपातकालीन कार्रवाई योजना (ईएपी), जलाश्‍य प्रचालन नीति, द्वार प्रचालन, बांध सुरक्षा में यंत्रीकरण की भूमिका, आपदा में रिसाव नियंत्रण सहित बांधों की बहाली, जलाशय प्रेरित भूकम्‍प का जोखिम, बांधों पर भूकम्‍प का प्रभाव, बांधों की विफलता का इतिहास, बांध सुरक्षा बिल, राष्‍ट्रीय जल विज्ञान योजना और आईएनसीओएलडी पत्र।

            अंतर-राज्‍यीय जल विवाद अधिनियम 1956, नदी बोर्ड अधिनियम 1956, स्‍थायी जल विवाद अधिकरण, एसवाईएल मामला, भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 51ए, 131,136,143 (1), 246, 262, सूची I की प्रविष्टि संख्‍या 56 और सूची II की प्रविष्टि संख्‍या 17.   

            इनका व्‍यावसायिक सेवा रिकार्ड उत्‍कृष्‍ट, निष्‍कलंक एवं त्रुटिहीन रहा है। इन्‍होने वर्ष 1995 और  1996 में आईआईटी द्वारा आयोजित गेट प्रतियोगी परिक्षा उर्तीण की। ‘’इन्‍होंने आई आई टी द्वारा वर्ष अर्थात 1994, 1995 एवं 1997 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित अभियन्त्रिक सेवाएं परीक्षा उत्‍तीर्ण की और 1996 में इनका चयन सीआरपीएफ  में अस्सिटैंट कमानडैंट के पद के लिए हो गया। वर्ष 1997-1998 में इन्‍होंने गर्वरमैंट पोलीटैकनिक दिल्‍ली एवं वाई एम सी ए इंजीनियरिंग संस्‍थान फरीदाबाद जो अब विश्‍वविद्यालय है में प्रवक्‍ता के पद पर कार्य किया। इन्हें एनसीसी में 'सी' प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। ये सुफी गज़लों और गानों के अच्छे श्रोता एवं गायक हैं। ये वृक्षारोपण एवं बागवानी में हमेशा व्यस्त रहते हैं। इन्‍हें यात्रा करने में आनंद आता है।

  • इंजी.हरमिंदर सिंह चुघ

    इंजी.हरमिंदर सिंह चुघ सदस्‍य (विद्युत)

    इंजी.हरमिंदर सिंह चुघ

    इंजी.हरमिंदर सिंह चुघ

    सदस्‍य (विद्युत)

                   इंजी. हरमिन्दर सिंह चुघ ने पीएसपीसीएल, पटियाला से बीबीएमबी चण्डीगढ़ में दिनांक 5.7.2018 को मुख्य अभियंता प्रणाली परिचालन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया । इनका जन्म दिनांक 5.10.1962 को हुआ । वर्ष 1984 में इन्होनें आर.ई.सी.के. (RECK) (जो वर्तमान में एनआईटी (NIT) कुरूक्षेत्र है)  से बी.एस.ई. इंजीनियरिंग (मैकेनिकल) की डिग्री प्राप्त की तथा  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से  विपणन प्रबंधन में स्नातकोतर डिप्लोमा प्राप्त किया । इन्होंने वर्ष 1985 में पीएसईबी (अब पीएसपीसीएल) में पदभागर ग्रहण किया । 

               पीएसपीसीएल में दिनांक 22.5.1985 से इन्हें उत्पादन,  वितरण एवं पारेषण संगठनों के सभी पहलुओं पर विभिन्‍न क्षमताओं में कार्य करने का 33 वर्षों का कुशल अनुभव प्राप्त है । पीएसपीसीएल तथा बीबीएमबी में अपने 33 वर्षों में से आज तक, 25 वर्षों का उत्पादन के क्षेत्र में इनका पर्याप्त अनुभव है । अनुभवों का विस्तृत विवरण निम्नानुसार है :-

    1. इन्होंने लगभग 3 वर्ष (1985 से 1988 तक) पीएसपीसीएल के पारेषण संगठन में सहायक अभियंता के रूप में कार्य किया, जिसमें इन्होंने योजना, निगरानी तथा पारेषण एवं उपकेन्द्रों के लिए निधि आबंटन के कार्य किए  ।

    2.  इन्होंने लगभग 5 वर्षों तक पीएसपीसीएल के वितरण संगठन में बतौर सहायक अभियंता के रूप में सेवा की।

    3. इन्होंने 20 वर्षों (1993 से 2012) तक गुरू गोबिन्द सिंह सुपर थर्मल प्लांट (जीजीएसएसटीपी) में विभिन्‍न पदों पर जैसे – सहायक कार्यकारी अभियंता, वरिष्ठ कार्यकारी अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के रूप में जी.जी.एस.एस.टी.पी. के 210 मैगावाट यूनिटों का परिचालन, पी.एल.सी. के परिचालन एवं अनुरक्षण, ड्राई फलाई ऐश की न्युमैटिक  प्रणालीकी निगरानी, एफ.एस.एस.एस. प्रणाली का परिचालन एवं अनुरक्षण, माप प्रणाली तथा जी.जी.एस.एस.टी.पी. के 210 मैगावाट यूनिटों की इंटरलॉक प्रणाली के संचालन तथा रख –रखाव के महत्वपूर्ण कार्य किए हैं ।

    4.  इन्होंने लगभग 1½ वर्षों तक पीएसपीसीएल के निदेशक/उत्पादन के कार्यालय में बतौर अधीक्षण अभि‍यन्ता/तकनीकी कार्य किया तथा निदेशक/उत्पादन के अधीन सभी मुख्य अभियंताओं से घनिष्ठ समन्वय के साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायता की।

    5. इन्होंने उप-मुख्य अभियंता /ईंधन, पीएसपीसीएल, पटियाला में लगभग 3 वर्षों तक कार्य किया जिसमें इन्होंने पीएसपीसीएल के सभी कोयला संयंत्रों के लिए कोयले की आपूर्ति प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।  पछवाड़ा सेंट्रल कोल माइन के संचालन के लिए आवश्यक मंजूरी/लाइसेंस प्राप्त करने की जिम्मेदारी संभाली। पछवाड़ा सेंट्रल कोल माइन के संचालन के लिए एमडीओ के चयन की बोली के दस्तावेजों की तैयारी/प्रकाशन की जिम्मेदारी के रूप में सेवा प्रदान की।

    6.  दिनांक 3.5.2018 से 3.7.2018 तक पीएसपीसीएल में सीएमडी के मुख्य अभि‍यन्ता/ओएसडी का कार्य किया । इस पद पर रहते हुए सीएमडी, पीएसपीसीएल को प्रशासनिक एवं तकनीकी मुद्दों पर सहायता प्रदान की तथा दिनांक 5.7.2018 से बीबीएमबी चण्डीगढ़ में बतौर मुख्य अभियंता सेवारत  हैं । 

    उपलब्ध‍ियाँ :-

    1. जीजीएसएसटीपी में पीएलसी तथा ड्राई फलाई ऐश हैंडलिंग की न्युमैटिक प्रणाली का संचालनतथा जीजीएसएसटीपी की स्टेज-1 में ए.बी.बी. मेक  सकाडा (SCADA) आधारित इंटरलॉक प्रणाली को चालू करवाना। 

    2. कार्यकारी अभियंता (रखरखाव) के लिए उन्नत प्रशि‍क्षण कार्यक्रम में भाग लेन के लिए मार्च 2006 के दौरान केडब्ल्यूएस विद्युत तक‍नीकी ट्रेनिंग सेंटर,  जर्मनी का दौरा किया।

     

     

     

  • श्री राजिंद्र कुमार

    श्री राजिंद्र कुमार वित्‍तीय सलाहकार एवं मुख्‍य लेखा अधिकारी

    श्री राजिंद्र कुमार

    श्री राजिंद्र कुमार

    वित्‍तीय सलाहकार एवं मुख्‍य लेखा अधिकारी

                 श्री राजिंद्र कुमार, भारतीय आर्थिक सेवा (आई.ई.एस.2003) ने 25 फरवरी, 2019 को वित्‍तीय सलाहकार एवं मुख्‍य लेखाधिकारी का कार्यभार संभाला। इससे पहले  व‍ह रक्षा मंत्रालय, नई दिल्‍ली में निदेशक के पद पर कार्यरत थे ।

    शैक्षणिक योग्‍यता :-                         

            वर्ष 1997 में गुरू नानक देव विश्‍वविद्यालय (GNDU) अमृतसर,पंजाब से अर्थशास्‍त्र में एम.एससी.(ऑनर्स), वर्ष 2001 में प्रबन्‍धन में IGNOU, नई दिल्‍ली  से स्‍नातकोत्‍तर  डिप्‍लोमा और वर्ष 2007 में अंतर्राष्‍ट्रीय  कानून की भारतीय सोसायटी (आईएसआईएल) नई दिल्‍ली से अंतर्राष्‍ट्रीय कानून एवं कूटनीति में स्‍नातकोत्‍तर डिप्‍लोमा किया।

             वर्ष 2008 में सिंगापुर के राष्‍ट्रीय विश्‍वविद्यालय से क्षेत्रीय व्‍यापार नीति में डिप्‍लोमा और वर्ष 2018 में पंजाब विश्‍वविद्यालय चण्‍डीगढ़ से अर्थशास्‍त्र में एमफिल की।

    अनुभव

             इन्‍होनें वित्‍त मंत्रालय, आर्थिक मामले विभाग, भारत सरकार, नई दिल्‍ली में उप आर्थिक सलाहकार के पद पर कार्य किया । इसके अतिरिक्‍त  इन्‍होनें देश व विदेश में विभिन्‍न प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग लिया ।

     

  • इंजी. तरूण अग्रवाल

    इंजी. तरूण अग्रवाल सचिव

    इंजी. तरूण अग्रवाल

    इंजी. तरूण अग्रवाल

    सचिव

    शैक्षणिक योग्‍यताएं

    इन्‍होंने पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज (पीईसी चंडीगढ़) से वर्ष 1989-1993 में बैचलर ऑफ  इंजीनियरिंग (सिविल) की डिग्री प्राप्‍त की ।

    राष्‍ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्‍थान, कुरूक्षेत्र हरियाणा से वर्ष 1994-1996 में मास्‍टर ऑफ टैकनोलोजी (स्‍ट्रक्‍चर) की डिग्री प्राप्‍त की ।

     व्‍यावसायिक अनुभव और विशेषज्ञता:- 22 वर्षों से अधिक का निम्‍नलिखित अग्रणी बड़ी परियोजनाओं में कार्यानुभव

    ~ परियोजना प्रबंधन                              ~ परियोजना प्‍लानिंग          ~ परियोजना प्रशासन

    ~ संरचनात्‍मक अभिकल्‍प                       ~ बजटिंग                          ~ जल निकासी प्रणाली प्रबंधन

    ~ परियोजना संचालन एवं अनुरक्षण         ~ परियोजना रूपांतरण          ~ नहर लाइनिंग

     सम्‍मेलन एवं सेमिनार

    • इन्‍होंने 2 से 6 जुलाई, 2018 तक वियेना, आस्ट्रिया में 26वीं आइकोल्‍ड (ICOLD) कांग्रेस, 86वीं ICOLD की वार्षिक बैठक और हाइड्रो इंजिनिरिंग संगोष्‍ठी में भाग लिया ।
    • सम्‍पूर्ण भारत में जल विद्युत परियोजनाओं पर बाढ़ का प्रभाव और स्थिति के अध्ययन हेतु विद्युत मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा गठित समिति के सदस्‍य सचिव ।
    • सतत जल प्रबंधन पर चंडीगढ़ में प्रथम अंतर्राष्‍ट्रीय सम्‍मेलन आयोजित करने के लिए विश्‍व बैंक द्वारा प्रायोजित भारत सरकार की राष्‍ट्रीय पन योजना की आयोजन समिति के सदस्‍य  ।

    अध्‍ययन  

    भाखड़ा बांध जलाशय में संचित गाद के उत्‍पादक उपयोग का एक अध्‍ययन करवाने के लिए आई आई टी, रूड़की के साथ जुड़े हैं ।    

    इन्‍होंने आई आई टी, रोपड़ के सहयोग से भाखड़ा बांध के जल ग्रहण क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के परिदृश्‍य के तहत मिट्टी कटान के परिसीमन और बाढ़ संचालित तलछट के हस्‍तांतरण  के आकलन का अध्‍ययन किया ।

     व्‍यावसायिक अनुभव

    नवम्‍बर 2015 से आज तक – सचिव, भाखड़ा ब्‍यास प्रबंध बोर्ड, चंडीगढ़ (बहुउददेशीय सिंचाई योजनाओं के साथ – साथ 2900 मेगावाट पन बिजली विद्युत उत्‍पादन संगठन) ।

    महत्‍वपूर्ण जिम्‍मेदारियॉं

    • नंगल हाइडल चैनल एवं सुन्‍दरनगर हाइडल चैनल की संवाहक जल प्रणालियों का सुगम संचालन एवं अनुरक्ष्‍ण ।
    • 10 हज़ार से अधिक कर्मचारियों की संख्‍या वाले संगठन का प्रबंधन और चार राज्‍यों  से मिलकर अंतर्राष्‍ट्रीय मुद्धों से निपटना (हरियाणा, हिमाचल, पंजाब एवं राजस्‍थान) ।
    • बीबीएमबी के तकनीकी एवं प्रशासनिक मामालों को संभालने के साथ-साथ कर्मचारी संगठनों के साथ लाभप्रद एवं सौहार्दपूर्ण औद्योगिक सम्पर्क बनाना ।
    • पंजाब, हरियाणा एवं राजस्‍थान के उत्‍तरी राज्‍यों के जल वितरण निर्णय हेतु अंतर्राष्‍ट्रीय तकनीकी समिति में मुख्‍य प्रस्‍तावक  के रूप में कार्य करना और न्‍यायसंगत एवं समान जल के वितरण को सुगम बनाना।
    • 2015 की मानसून के दौरान भारी बाढ़ का बहाव क्षेत्र में बाढ़/विध्‍वंस को बचाने हेतु नियमन किया ।
    • 2018 की मानसून की महत्‍वपूर्ण अवधि के दौरान सभी भागीदार राज्‍यों की मांगों को ध्‍यान में रखते हुए  भाखड़ा और पौंग जलाश्‍यों  का प्रबंधन ।
    • इंजीनियरों एवं कर्मचारियों की मानव संसाधन सलाह एवं विकास में सहायक रहे ।
    • राष्‍ट्रीय हाइड्रोलोजी परियोजना के अन्‍तर्गत स्‍थापित  रियल टाइम डाटा अधिग्रहण प्रणाली और रियल टाइम डिसीजन सपोर्ट सिस्‍टम  के परिचालन तथा अनुरक्षण में लगे इंजीनियरों की टीम का नेतृत्‍व किया। परियोजना का उद्देश्‍य  भारत में उच्‍च स्‍तर तक गुणवत्‍ता  और संसाधन सूचना का एक्‍सेसिबिलिटी, बाढ़ के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्‍टम, बेसिन लेवल संसाधन मूल्‍यांकन/योजना लक्षित जल संसाधन प्रोफेशनल की क्षमता को मजबूत बनाना और प्रबन्‍धन करना है । 
  • इंजी. रनवीर सिंह जाल्टा

    इंजी. रनवीर सिंह जाल्टा विशेष सचिव

    इंजी. रनवीर सिंह जाल्टा

    इंजी. रनवीर सिंह जाल्टा

    विशेष सचिव

    इंजी. रनवीर सिंह जाल्टा ने 02.04.2012 को बीबीएमबी में विशेष सचिव के पद पर कार्य ग्रहण किया। इन्होंने भोपाल युनिवर्सिटी से बी.ई (इलैक्ट्रिकल) और आईआईटी रूड़की युनिवर्सिटी से एम.ई. की परीक्षा पास की है। विद्युत क्षेत्र में गत 25 वर्षों की सेवा के दौरान एनटीपीसी, एचपीएसईबी, सीईए, एसजेवीएनएल और एचपीईआरसी जैसे विभिन्न संगठनों में विभिन्न पदों पर कार्य किया है। इन्हें विद्युत उत्पादन, पारेषण तथा विद्युत यूटीलिटिज़ के नियमन कार्यों का काफी अनुभव है। वर्तमान पद से पूर्व ये हिमाचल प्रदेश विद्युत विनायमक आयोग में कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्य कर रहे थे, जहां ये विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण में विभिन्न विनियामक कार्य संभाल रहे थे। बोर्ड के विशेष सचिव के रूप में ये फिलहाल स्थापना एवं वर्कस से सम्बन्धित नीति विषयक दिशा-निर्देश और विद्युत खण्ड के कार्य करने के लिए अध्यक्ष, बीबीएमबी की सहायता कर रहे है। ये बीबीएमबी के मुख्य सतर्कता अधिकारी के दायित्वों का निर्वहन भी कर रहे हैं।

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