भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड

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बोर्ड के सदस्‍य

  • श्री देवेंद्र कुमार शर्मा

    श्री देवेंद्र कुमार शर्माअध्‍यक्ष

    श्री देवेंद्र कुमार शर्मा

    श्री देवेंद्र कुमार शर्मा

    अध्‍यक्ष

    इंजी. देवेन्द्र कुमार शर्मा ने 21 अप्रैल, 2017 को भाखड़ा ब्यास प्रबन्ध बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में कार्यभार ग्रहण किया। इनका भारत और विदेश में ऊर्जा क्षेत्र में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। इन्होंने वर्ष 1981 में इंदौर विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की। इन्होनें एशियन प्रौद्यिगिकी संस्थान बैंकाक, थाईलैंड से जल संसाधन इंजीनियरिंग में मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग के अध्ययन के लिए नीदरलैंड सरकार की फैलोशिप प्राप्त की। इन्होंने कनाड़ा (1987), स्वीडन (1989), हंगरी (1991), जापान (1994) तथा नार्वे (1999 एवं 2003) से जल विद्युत योजना एवं अभिकल्प इंजीनियरिंग में प्रशिक्षण कोर्स किए हैं। इन्होंने 1991 में अनुसंधान संस्थान  (VITUKI) बुडापेस्ट, हंगरी से हाइड्रोलॉजी में अन्तर्राष्ट्रीय स्नातकोत्तर कोर्स के लिए यूनेस्कों फैलोशिप प्राप्त की। इन्होंने अन्तर्राष्ट्रीय सैंटर फार हाइड्रोपावर, TRONDHEIM, नार्वें में 1999 के दौरान "जल विद्युत तथा पर्यावरण" के नोराड स्कॉलर के रूप में तथा 2003 के दौरान "एकीकृत जल संसाधन प्रबन्धन के संदर्भ में जल विद्युत विकास" पाठ्यक्रमों में भाग लिया। इन्होंने ताला पन बिजली परियोजना प्राधिकरण में कार्यरत रहते हुए जल विद्युत क्षेत्र में कार्य निष्पादन, समर्पित सेवाएं तथा सराहनीय योगदान हेतु " मैन ऑफ द ईयर" 1999 का पुरस्कार प्राप्त किया। भारत और भूटान में सरकारी क्षेत्र के लिए कार्य करने के अलावा इनके कॉरपोरेट क्षेत्र अर्थात लारसन एण्ड टूब्रो लिमिटेड के साथ पन बिजली परियोजनाओं के निर्माण तथा कम्पनी को मालिकाना स्वामित्व वाली जल विद्युत परियोजनाओं के विकास के लिए भी लगभग 6 वर्षों तक उच्च पद पर कार्य करने का अनुभव है।

         इससे पहले ये 2012 से हिमाचल विद्युत निगम लिमिटेड (हिमाचल प्रदेश सरकार का उपक्रम) के प्रबन्ध निदेशक तथा बोर्ड के सदस्य के रूप में कार्यरत थे। हिमाचल प्रदेश विद्युत निगम लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के प्रबन्ध निदेशक के रूप में इनके ऊपर 3x65 मेगावाट कसांग जल विद्युत परियोजना को चालू कराने की जिम्मेदारी रही है और इन्होंने 100एम सेंज परियोजना पूरी की है। इन्होंने प्रणाली को जवाबदेह ओर कुशल बनाया है और एक अत्यन्त नवोदित संगठन को भारत के ऊर्जा क्षेत्र में कार्य कर रहे केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम के समान तकनीकी एवं संगठनात्मक क्षमताओं के साथ एक तेजी से विकसित हो रही विद्युत उत्पादक यूटीलिटी में परिवर्तित कर दिया है।

         ये अन्तर्राष्ट्रीय जल विद्युत एसोसिएशन और जल विद्युत क्षेत्र में कार्यरत अनेक अन्य अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय व्यावसायिक निकायों के आजीवन सदस्य हैं। राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय पत्रों में इनके 27 तकनीकी पत्र प्रकाशित हो चुके हैं।

  • इंजी.हरमिंदर सिंह चुघ

    इंजी.हरमिंदर सिंह चुघसदस्‍य (विद्युत)

    इंजी.हरमिंदर सिंह चुघ

    इंजी.हरमिंदर सिंह चुघ

    सदस्‍य (विद्युत)

                   इंजी. हरमिन्दर सिंह चुघ ने पीएसपीसीएल, पटियाला से बीबीएमबी चण्डीगढ़ में दिनांक 5.7.2018 को मुख्य अभियंता प्रणाली परिचालन के रूप में कार्यभार ग्रहण किया । इनका जन्म दिनांक 5.10.1962 को हुआ । वर्ष 1984 में इन्होनें आर.ई.सी.के. (RECK) (जो वर्तमान में एनआईटी (NIT) कुरूक्षेत्र है)  से बी.एस.ई. इंजीनियरिंग (मैकेनिकल) की डिग्री प्राप्त की तथा  इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से  विपणन प्रबंधन में स्नातकोतर डिप्लोमा प्राप्त किया । इन्होंने वर्ष 1985 में पीएसईबी (अब पीएसपीसीएल) में पदभागर ग्रहण किया । 

               पीएसपीसीएल में दिनांक 22.5.1985 से इन्हें उत्पादन,  वितरण एवं पारेषण संगठनों के सभी पहलुओं पर विभिन्‍न क्षमताओं में कार्य करने का 33 वर्षों का कुशल अनुभव प्राप्त है । पीएसपीसीएल तथा बीबीएमबी में अपने 33 वर्षों में से आज तक, 25 वर्षों का उत्पादन के क्षेत्र में इनका पर्याप्त अनुभव है । अनुभवों का विस्तृत विवरण निम्नानुसार है :-

    1. इन्होंने लगभग 3 वर्ष (1985 से 1988 तक) पीएसपीसीएल के पारेषण संगठन में सहायक अभियंता के रूप में कार्य किया, जिसमें इन्होंने योजना, निगरानी तथा पारेषण एवं उपकेन्द्रों के लिए निधि आबंटन के कार्य किए  ।

    2.  इन्होंने लगभग 5 वर्षों तक पीएसपीसीएल के वितरण संगठन में बतौर सहायक अभियंता के रूप में सेवा की।

    3. इन्होंने 20 वर्षों (1993 से 2012) तक गुरू गोबिन्द सिंह सुपर थर्मल प्लांट (जीजीएसएसटीपी) में विभिन्‍न पदों पर जैसे – सहायक कार्यकारी अभियंता, वरिष्ठ कार्यकारी अभियंता एवं अधीक्षण अभियंता के रूप में जी.जी.एस.एस.टी.पी. के 210 मैगावाट यूनिटों का परिचालन, पी.एल.सी. के परिचालन एवं अनुरक्षण, ड्राई फलाई ऐश की न्युमैटिक  प्रणालीकी निगरानी, एफ.एस.एस.एस. प्रणाली का परिचालन एवं अनुरक्षण, माप प्रणाली तथा जी.जी.एस.एस.टी.पी. के 210 मैगावाट यूनिटों की इंटरलॉक प्रणाली के संचालन तथा रख –रखाव के महत्वपूर्ण कार्य किए हैं ।

    4.  इन्होंने लगभग 1½ वर्षों तक पीएसपीसीएल के निदेशक/उत्पादन के कार्यालय में बतौर अधीक्षण अभि‍यन्ता/तकनीकी कार्य किया तथा निदेशक/उत्पादन के अधीन सभी मुख्य अभियंताओं से घनिष्ठ समन्वय के साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया में सहायता की।

    5. इन्होंने उप-मुख्य अभियंता /ईंधन, पीएसपीसीएल, पटियाला में लगभग 3 वर्षों तक कार्य किया जिसमें इन्होंने पीएसपीसीएल के सभी कोयला संयंत्रों के लिए कोयले की आपूर्ति प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।  पछवाड़ा सेंट्रल कोल माइन के संचालन के लिए आवश्यक मंजूरी/लाइसेंस प्राप्त करने की जिम्मेदारी संभाली। पछवाड़ा सेंट्रल कोल माइन के संचालन के लिए एमडीओ के चयन की बोली के दस्तावेजों की तैयारी/प्रकाशन की जिम्मेदारी के रूप में सेवा प्रदान की।

    6.  दिनांक 3.5.2018 से 3.7.2018 तक पीएसपीसीएल में सीएमडी के मुख्य अभि‍यन्ता/ओएसडी का कार्य किया । इस पद पर रहते हुए सीएमडी, पीएसपीसीएल को प्रशासनिक एवं तकनीकी मुद्दों पर सहायता प्रदान की तथा दिनांक 5.7.2018 से बीबीएमबी चण्डीगढ़ में बतौर मुख्य अभियंता सेवारत  हैं । 

    उपलब्ध‍ियाँ :-

    1. जीजीएसएसटीपी में पीएलसी तथा ड्राई फलाई ऐश हैंडलिंग की न्युमैटिक प्रणाली का संचालनतथा जीजीएसएसटीपी की स्टेज-1 में ए.बी.बी. मेक  सकाडा (SCADA) आधारित इंटरलॉक प्रणाली को चालू करवाना। 

    2. कार्यकारी अभियंता (रखरखाव) के लिए उन्नत प्रशि‍क्षण कार्यक्रम में भाग लेन के लिए मार्च 2006 के दौरान केडब्ल्यूएस विद्युत तक‍नीकी ट्रेनिंग सेंटर,  जर्मनी का दौरा किया।

     

     

     

  • डॉ. गुलाब सिंह नरवाल

    डॉ. गुलाब सिंह नरवालसदस्‍य (सिंचाई)

    डॉ. गुलाब सिंह नरवाल

    डॉ. गुलाब सिंह नरवाल

    सदस्‍य (सिंचाई)

    डॉ. गुलाब सिंह नरवाल ने 27 मार्च 2019 को भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में सदस्य सिंचाई का पद ग्रहण किया। इससे पहले, उन्हें मुख्य अभियंता, बीएसएल प्रोजेक्ट बीबीएमबी सुंदर नगर एचपी के पद पर नियुक्त किया गया था।इनका जन्म 03 मार्च 1969 को जिला हिसार हरियाणा में हुआ था। ये वर्ष 1998 में संघ लोक सेवा आयोग की अभियान्त्रिकी सेवाओं के समकक्ष परीक्षा द्वारा हरियाणा सिंचाई विभाग में अतिरिक्‍त कार्यकारी अभियन्‍ता, श्रेणी-1 के रूप में नियुक्‍त हुए। इन्‍हें वर्ष 1999 में कार्यकारी अभियंता, 2008 में अधीक्षण अभियन्‍ता और 2012 (मानी गई तिथि) में मुख्य अभियंता के रूप में पदोन्नत किया गया। इन्होंने राजकीय पोलीटेकनिक, झज्जर,  हरियाणा से उत्‍पादन अभियान्त्रिकी में डिप्लोमा, बीई (सिविल), बीई (अभियान्त्रिकी), एम.टेक (आईआईटी दिल्ली), एलएलबी, एलएलएम, एमबीए (ऑपरेशंस मैनेजमेंट), एम फिल (प्रबन्‍धन), एमएससी (पर्यावरण), एमएससी (कम्‍पयूटर सांईस), एमसीए, एमए (लोक प्रशासन), एमए (इतिहास) और पीएचडी (वनस्पति विज्ञान) किया। इन्‍हें सिंचाई और जल संसाधन परियोजनाओं में योजना, अभिकल्‍प और निर्माण का 21 वर्ष का अनुभव है। इन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्रिकाओं में 12 तकनीकी पत्र प्रस्तुत किए हैं तथा आईडब्‍लयूआरएम विषय पर वर्ष 2007 में सिंगापुर में भारत का प्रतिनिधित्व किया। ये 12 राष्ट्रीय इंजीनियरिंग संस्थानों/समिति के आजीवन सदस्य हैं। ये इंस्टिट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के फैलो सदस्‍य भी हैं। वे एफआईई एवं पीई धारक है।

     पैत्रिक विभाग में उपलब्धियां

            उन्हें विभाग में उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए 4 प्रशंसा पत्र दिए गए थे। पहली बार वर्ष 2005 में निदेशक राज्य सतर्कता ब्यूरो हरियाणा ने उनकी एक साल की तैनाती के दौरान सतर्कता जांचों   के निपटारे के संबंध में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया था। दूसरी बार वर्ष 2008 में एडीसी व सीईओ डीआरडीए कुरुक्षेत्र द्वारा सरस्वती परियोजना की योजना और निष्पादन के लिए सम्मानित किया गया था। दूर दराज लोगों के लिए पेयजल सुविधाएं प्रदान करने के लिए जिला भिवानी में उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री (एमपीएचई) द्वारा वर्ष 2015 में तीसरी बार सम्‍मानित किया गया था। चौथा पुरस्‍कार वर्ष 2019 में कृषि मंत्री हि0प्र0 द्वारा स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, हिंदी को बढ़ावा देने और असाधारण शैक्षिक योग्यता प्राप्त करने के लिए प्रदान किया गया। अपने विशिष्ट कैरियर के दौरान वे नई ऊंचाइयों तक पहुंचे और लिफ्ट नहर इकाई, यमुना जल सेवा इकाई, भाखड़ा जल सेवा इकाई, निर्माण इकाई और सतर्कता इकाई जैसी कई परियोजनाओं की सेवा करके विभाग को अपना योगदान दिया। इस दौरान निद्रा को अधिमान न देकर रातों में छापे मारने के व्‍यक्तिगत प्रयासों से जांच करके पानी की चोरी रोकी। अपने व्यक्तिगत प्रयासों के कारण, पानी कमांड के अंतिम सिरे तक पहुंच सका। उन्हें भाखड़ा मेन लाइन, नरवाना शाखा, डब्ल्यूजेसी, समानांतर दिल्ली शाखा, कैरियर लाइन चैनल, सुंदर उप शाखा, लोहरु नहर और गुड़गांव नहर जैसी हरियाणा की प्रमुख नहरों के विनियमन और रखरखाव का भी अनुभव है। उन्होंने हथनी कुंड बैराज, ताजेवाला कॉम्प्लेक्स और कौशल्‍या डैम पर भी काम किया। उन्होंने यमुना नदी पर कई नदी प्रशिक्षण कार्यों को निष्पादित किया। उन्होंने डीवाटरिंग, बाढ़ नियंत्रण, सीएडीए (काडा), तालाब के विकास और लिफ्ट सिंचाई कार्यों को भी निष्पादित किया। उन्होंने गुजरात, मध्‍यप्रदेश, महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों का दौरा करके किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया।

                   फील्‍ड में भरपूर अनुभव के कारण, वे राज्‍य स्‍तर की पर्यावरण, सहभागिता सिंचाई प्रबन्‍धन, राज्‍य जल नीति, एकीकृत जल संसाधन प्रबन्‍धन जैसी महत्‍वपूर्ण नीतियां बनाने एवं उनके कार्यान्‍वयन की रणनीतियों व उनके मूल्‍यांकन की योजनाओं में सक्रिय सहभागी रहे। विधि, सूचना तकनीकी (आईटी)    पर्यावरण एवं प्रबन्‍धन की शिक्षा ने उनके दृष्टिकोण  में एक नये आयाम जोड़ दिए और इसी कारण उन्‍हें जल संसाधन प्रबन्‍ध, अन्‍तर-राज्‍यीय जल सम्‍बन्‍धी मामलों, संविदाओं आदि से सबद्ध कानूनी पक्षों को समझने में मदद मिली है। उन्‍हें विश्‍व बैंक परियोजनाओं का व्‍यापक अनुभव प्राप्‍त है, क्‍योंकि उन्‍होंने हरियाणा जल संसाधन एकीकरण परियोजना (एसडब्‍लयूआरसीपी 1994-2001) में विश्‍व बैंक के कर्मियों के साथ मिलकर कार्य किया और विश्‍व बैंक की नीतियों, निगरानी, पर्यवेक्षण आदि की जानकारी प्राप्‍त की और विश्‍व बैंक के लिए राज्‍य के मुख्‍य विशेषज्ञ रहे।

    बीएसएल परियोजना, बीबीएमबी में उपलब्धियां

    1.       भाखड़ा ब्‍यास प्रबंध बोर्ड (बीबीएमबी) के दो सिंचाई इकाइयों सुन्‍दरनगर हि0प्र0 स्थित ब्‍यास सतलुज लिंक एवं ब्‍यास बांध पौंग को सिंचाई एवं विद्युत केन्‍द्रीय बोर्ड द्वारा पिछले 10 वर्षों से उत्‍कृष्‍ट अनुरक्षित परियोजनाओं की श्रेणी के अंतर्गत वर्ष 2019 के लिए जल विद्युत सैक्‍टर में उत्‍कृष्‍ट प्रदर्शन के लिए राष्‍ट्रीय स्‍तर के पुरस्‍कार से नवाजा गया। इन पुरस्‍कारों का आधार यह था कि इन परियोजनाओं में नवीनतम तकनीकी का उपयोग किया गया व हर समय सतर्कता बरती गई।
    2. (ए) 1986 से प्रत्‍येक वर्ष जलग्रहण क्षेत्र से पर्याप्‍त अंतरवाह रहने पर पंडोह जलाशय का फ्लशिंग ऑपरेशन किया जा रहा है। वर्ष 2018 के दौरान उपलब्‍ध डिस्‍चार्ज के एक लाख क्‍यूजेक्‍स से अधिक होने पर दो फ्लशिंग ऑपरेशंस किए गए (4811.20 + 9602.73) अर्थात 14413.93 एकड़ फीट गाद फलश् आउट की गई, जो 1986 के बाद से एक ऐतिहासिक आंकड़ा है।

            (बी) पंडोह बांध से फ्लशिंग और सुंदरनगर के बैलंसिंग रिसर्वायर से कचरे की सफाई एक साथ की गयी :- पंडोह बांध में उच्‍च अंतर्वहन की अवधि में फ्लशिंग करना एक वार्षिक कार्यकलाप है इस आपरेशन में बैलेसिंग रिसर्वायर सुंदरनगर में पानी का आगमन रोकना पड़ता है परिणाम डेहर पावर हाउस के विद्यत संयंत्र बंद हो जाते है, उसी प्रकार कचरे की सफाई करने के लिए पुंग ब्‍यास सतलुज लिंक, सुंदरनगर में पानी का प्रवेश रोकना होता है जिसके कारण बैलंसिंग रिसर्वायर का जल स्‍तर न्‍यूनतम स्‍तर पर पहुंच जाता है, इससे पूर्व पंडोह बांध की फ्लशिंग और कचरे की सफाई का कार्य अलग-2 किया जाता था जिससे डीपीएच से विद्युत उत्‍पादन की हानि होती थी, इस वर्ष 13 व 14 अगस्‍त 2018 को पंडोह बांध से फ्लशिंग और सुन्‍दरनगर के बैलंसिंग रिसर्वायर से कचरे की सफाई का काम एक साथ करने का निर्णय किया गया। इस संगठित कार्य से विद्युत उत्‍पादन में नगण्‍य कमी आयी क्‍योंकि विद्युत संयंत्रों को कम समय के लिये बंद रखना पड़ा जहां पहले तीन वर्षों में हर वर्ष औसतन 98.43 लाख युनिट विद्युत उत्‍पादन कम होती थी वहीं इस वर्ष मात्र 19.69 लाख युनिट हुई। यह कमी पंडोह बांध से फ्लशिंग और सुंदरनगर के बैलंसिंग रिसर्वायर से कचरे की सफाई एक साथ करने के कारण हुई और इस प्रकार यदि देखा जाये तो 118.12 लाख युनिट जिसकी राष्‍ट्रीय औसत विद्युत क्रय मूल्‍य (एपीपीसी) 3.53 के डब्‍ल्‍यू नोशनल मूल्‍य के आधार पर लगभग 417 लाख रूपये का वित्‍तीय लाभ एक साथ फ्लशिंग और ट्रेश कलीनिंग का कार्य करने से हुआ।

    1. इन्होंने वृक्षारोपण कार्यक्रमों, स्‍वच्‍छ भारत मिशन जैसी पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों के साथ-साथ बीबीएमबी कार्यालयों में राजभाषा हिंदी को बढ़ावा देने में गहरी रूचि ली जिसके लिए माननीय अध्यक्ष ने अपने दौरों के दौरान नोट में उनके प्रयासों की सराहना की।
    2. पिछले दो सत्रों के दौरान, ड्रेजिंग ऑपरेशन बिना किसी ब्रेक डाउन के बहुत ही कुशल और निर्बाध रहा है। संतुलन जलाशय में जमा गाद को न्यूनतम स्तर तक निकाल दिया गया था। ईंधन की खपत और मरम्मत शुल्क न्यूनतम रहा। इन्‍होने अनेक नये/स़ृजनात्‍मक/अभिनव कार्य किये, ताकि मानव शक्ति, मशीनरी और फ्लोटिंग वेसल्‍स की दक्षता में सुधार हो सके, साथ ही ये ड्रेजर न्यूनतम लागत पर चलाये जाएं। संतुलन जलाशय की ढलान को साफ़ करने के लिए ड्रेजरों को पहली बार गैर-ड्रेजिंग क्षेत्र में भी प्रचालित किया था।
    3. बाई-पास टनल के भीतर जमा गाद को बाहर निकालने के लिए 3 वर्ष के बाद दिनांक 20.11.2018 को बाई-पास शूट को प्रचालित किया गया। किसी आकस्मिकता की स्थिति में पूरी प्रणाली की जांच करने के लिए द्वारों का आवधिक प्रचालन अनिवार्य है।     
    4. सुंदर नगर हाइडल चैनल बीएसएल परियोजना की जीवन रेखा है। भराई पहुंचों में चार स्थानों पर बाहरी ढलान में दलदल हो गया था, ढलान को तुरंत मूल डिजाइन स्तर पर बहाल कर दिया गया था।
    5. अपने कार्यकाल के दौरान बीबीएमबी की भूमि पर किए गए अनधिकृत निर्माण एवं अतिक्रमण हटाए गए। उदाहरण के तौर पर विरोधों के बावजूद पण्‍डोह कॉलोनी से अनधिकृत शराब की दुकान हटाई गई।
    6. स्मार्ट कलास आरम्‍भ करने, क्‍लोज़ सर्किट टीवी कैमरे लगाने और बीबीएमबी स्कूलों में अंतर-यूनिट खेल प्रतियोगिताओं को बढ़ावा देने के पीछे ये एक महत्वपूर्ण प्ररेक शक्ति रहे हैं।  बीबीएमबी कर्मचारियों की प्रतिस्पर्धात्‍मक तीक्ष्‍णता को प्रोत्साहित करने के लिए बीएसएल परियोजना में अंतर-यूनिट वालीबाल टूर्नामेंट, अंतर-यूनिट शतरंज और बैडमिंटन टूर्नामेंट जैसी विभिन्न खेल गतिविधियों/कार्यक्रमों का आयोजन/संचालन भी किया गया है।
    7.  ड्रेजर पाइपों के फैब्रीकेशन के लिए आवश्‍यक सेल हार्ड स्‍टील की पिछले दस वर्षों से अधिक समय से खरीद नहीं की गई थी। इन्‍होंने व्यक्तिगत हस्तक्षेप किया और मेसर्स सेल के साथ समन्‍वय किया और लम्‍बे समय से लम्बित मामले को हल कर स्‍टील की खरीद की। अब बीबीएमबी के पास इस स्टील की इतनी मात्रा उपलब्ध है कि अगले 2-3 वर्ष तक नंगल कार्यशाला द्वारा ड्रेजर पाइपों का लगातार फैब्रीकेशन किया जा सकता है और बीएसएल परियोजना के पास इतने पाइप होगें जो कि कम से कम अगले 30 वर्ष के लिए पर्याप्‍त होंगे।   
    8. इन्होंने पण्‍डोह तथा सुन्‍दरनगर में स्थित बीबीएमबी जल निकायों को, विशेषकर दुर्गा पूजा और गणेश उत्‍सव जैसे त्‍यौहारों के दौरान प्रदूषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाये।
    9. ये नि:शुल्‍क चिकित्‍सा शिविरों, रक्‍तदान शिविरों के साथ-साथ स्थानीय निकायों, शैक्षिक संस्थानों, वृद्धाश्रमों तथा अनाथालयों आदि के लिए वित्तीय सहायता की व्यवस्था करने जैसे समाज कल्याण कार्यक्रमों/क्रियाकलापों को आरम्‍भ करने के लिए निरन्‍तर सक्रिय रहे हैं।
    10. बीबीएमबी में इंजीनियरिंग के क्षेत्र में ज्ञान एवं कौशल वृद्धि के लिए इन्होंने वर्ष 2017 और 2018 में राष्‍ट्रीय जल अकादमी पुणे में ‘जल संसाधनों में महत्‍वपूर्ण मुद्दे’ और एकीकृत इंजीनियरिंग स्‍टाफ कालेज ऑफ इंडिया (ईएससीआई) हैदराबाद में ‘बांध सुरक्षा दिशा निदेश-बांधों की सुरक्षा के लिए निगरानी एवं संरक्षण उपाय’ से सम्‍बन्धित प्रशिक्षण में भाग लिया। उन्‍होनें बीबीएमबी द्वारा दिनांक  10-12 दिसम्‍बर, 2018 को चण्‍डीगढ़ में आयोजित स्‍थाई जल प्रबन्‍धन से संबंधित प्रथम अंतराष्‍ट्रीय सम्‍मेलन में भी भाग लिया।

       उनके अध्‍ययन के सशक्‍त क्षेत्र      

                   राष्‍ट्रीय जल मिशन (एनडब्‍ल्‍यूएम) के अन्‍तर्गत सिंचाई क्षेत्र में पानी के कुशल प्रयोग को बढ़ाना, जल संसाधन के क्षेत्र में क्षमता निर्माण, जल संरक्षण, पानी की बर्बादी को कम करना और एकीकृत जल संसाधन प्रबन्‍ध (आईडब्‍ल्‍यूआरएम), राष्‍ट्रीय जल नीति 2012 के माध्‍यम से इसका अधिक न्‍यायसंगत वितरण सुनिश्चित करना, वृहद् एवं मध्‍यम सिंचाई परियोजनाओं का विस्‍तार, नवीकरण एवं आधुनिकीकरण (ईआरएम), जल निकायों की मरम्‍मत, नवीकरण एवं बहाली (आरआरआर), त्‍वरित सिंचाई लाभ योजना (एआईबीपी), जल संसाधन में अनुसंधान एवं विकास, जल अधिकार, जल बाजार, गुणकारी जल, जल प्रशुल्‍क एवं मूल्‍य निर्धारण, वाटर फूटप्रिंट, सिंचाई क्षेत्र में पीपीपी, वाटर एटीएम, प्रदूषक द्वारा भुगतान, माइक्रो सिंचाई, अधिकतम सिंचाई नियत करना, सहभागी सिंचाई प्रबन्‍ध (पीआईएम), पर्यावरण प्रवाह, पर्यावरण प्रभाव मूल्‍यांकन और पर्यावरण निगरानी योजना, जल गुणवत्‍ता के पहलू, अन्‍तर-राज्‍यीय जल विवाद, जल विनियामक प्राधिकरण, नदी घाटी संगठन, एकीकृत नदी घाटी योजना एवं प्रबन्‍ध तथा यूनेस्‍को बहुल मानदंड विश्‍लेषण, राष्‍ट्रीय जल फ्रेमवर्क कानून/बिल, जल का संयुक्‍त प्रयोग, भू-जल विकास एवं प्रबन्‍ध, वर्षा जल संग्रहण, एचईसी-एचएमएस मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए जल-विज्ञान सम्‍बन्‍धी विश्‍लेषण, क्रॉपवाट तथा क्लिमवाट मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए सिंचाई जल प्रबन्‍ध, आईएसएआरईजी मॉडलिंग का प्रयोग करते हुए मृदा जल संतुलन का अनुकरण, जल संसाधन तंत्र अभियांत्रिकी, जलवायु परिवर्तन, समस्‍थानिक जल विज्ञान, नवीन जल अवधारणा, जल का पुनर्चक्रण एवं पुन:प्रयोग, नदियों का अन्‍तर सम्‍पर्क, बीबीएमबी में जल का नियमन।

                   बांध सुरक्षा समिति तथा दिशा निर्देश, बांधों की सुरक्षा के लिए निगरानी एवं संरक्षण उपाय, बांध पुनर्वास एवं सुधार परियोजना (डीआरआईपी), अंतर्वाह अभिकल्‍प बाढ़ (आईडीएफ), संभावित अधिकतम बाढ़ (पीएमएफ) तथा स्पिलवे का क्षमता निर्धारण, डैमब्रेक अध्‍ययन, सैलाब मानचित्र, आपातकालीन कार्रवाई योजना (ईएपी), जलाश्‍य प्रचालन नीति, द्वार प्रचालन, बांध सुरक्षा में यंत्रीकरण की भूमिका, आपदा में रिसाव नियंत्रण सहित बांधों की बहाली, जलाशय प्रेरित भूकम्‍प का जोखिम, बांधों पर भूकम्‍प का प्रभाव, बांधों की विफलता का इतिहास, बांध सुरक्षा बिल, राष्‍ट्रीय जल विज्ञान योजना और आईएनसीओएलडी पत्र।

            अंतर-राज्‍यीय जल विवाद अधिनियम 1956, नदी बोर्ड अधिनियम 1956, स्‍थायी जल विवाद अधिकरण, एसवाईएल मामला, भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 51ए, 131,136,143 (1), 246, 262, सूची I की प्रविष्टि संख्‍या 56 और सूची II की प्रविष्टि संख्‍या 17.   

            इनका व्‍यावसायिक सेवा रिकार्ड उत्‍कृष्‍ट, निष्‍कलंक एवं त्रुटिहीन रहा है। इन्‍होने वर्ष 1995 और  1996 में आईआईटी द्वारा आयोजित गेट प्रतियोगी परिक्षा उर्तीण की। ‘’इन्‍होंने आई आई टी द्वारा वर्ष अर्थात 1994, 1995 एवं 1997 में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित अभियन्त्रिक सेवाएं परीक्षा उत्‍तीर्ण की और 1996 में इनका चयन सीआरपीएफ  में अस्सिटैंट कमानडैंट के पद के लिए हो गया। वर्ष 1997-1998 में इन्‍होंने गर्वरमैंट पोलीटैकनिक दिल्‍ली एवं वाई एम सी ए इंजीनियरिंग संस्‍थान फरीदाबाद जो अब विश्‍वविद्यालय है में प्रवक्‍ता के पद पर कार्य किया। इन्हें एनसीसी में 'सी' प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया है। ये सुफी गज़लों और गानों के अच्छे श्रोता एवं गायक हैं। ये वृक्षारोपण एवं बागवानी में हमेशा व्यस्त रहते हैं। इन्‍हें यात्रा करने में आनंद आता है।

  • श्री अनिरूद्ध कुमार

    श्री अनिरूद्ध कुमारसदस्‍य, भारत सरकार

    श्री अनिरूद्ध कुमार

    श्री अनिरूद्ध कुमार

    सदस्‍य, भारत सरकार

                    श्री अनिरूद्ध कुमार, 1987  बैच के भारतीय राजस्‍व सेवा अधिकारी है  । इन्‍होंने अलीगढ़ मुस्‍लिम विश्‍वविद्यालय से 1984 में ऑनर्स के साथ इलैक्‍ट्रिकल इंजीनियरिंग में स्‍नातक और दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय से 1995 में विधि में स्‍नातक की शिक्षा प्राप्‍त की। 

               इन्‍होंने एनटीपीसी से अपने कैरियर की शुरूआत की जहां इन्‍होंने 1984 से 1987 तक सिंगरौली थर्मल विद्युत केन्‍द्र में कार्य किया । तत्‍पश्‍चात इन्‍होंने 1987 में भारतीय राजस्‍व सेवा में कार्यभार ग्रहण किया और 30 वर्षों से अधिक के सेवा काल के  दौरान इन्‍होंने कई महत्‍वपूर्ण विभागों जैसे राजस्‍व विभाग के कर नीति खण्‍ड, अंतर्राष्‍ट्रीय कराधान, वित्‍त मंत्रालय, आयकर विभाग में विभिन्‍न पदों पर, शहरी विकास म्रंत्रालय (2005 से 2009), विज्ञान तथा प्राद्योगिकी मंत्रालय (2009 से 2010) में कार्य किया । श्री अनिरूद्ध कुमार ने भारतीय शिष्‍ट मण्‍डल के सदस्‍य के रूप में विभिन्‍न सम्‍मेलनों तथा बैठकों में भाग लेने हेतु विश्‍व भर की बड़े पैमाने पर यात्रा की है । इनकी ट्रैकिंग के प्रति अभिरूचि है । इन्‍होंने हिमालय में मांऊट कैलाश और मानसरोवर सहित नेपाल में ट्रैकिंग की है ।

                श्री अनिरूद्ध कुमार लगभग 2.5 वर्ष तक विद्युत मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव (थर्मल) के रूप में कार्यरत रहे । इन्‍हें हाल ही में 24 जुलाई, 2018 को विद्युत म्रंत्रालय में संयुक्‍त सचिव (हाईड्रो) का प्रभार सौंपा गया है। आप एनटीपीसी लिमिटेड, दामोदर घाटी निगम तथा भाविनी  न्‍यूकलियर पावर रियक्‍टर बेसड फास्‍ट ब्रीडर टैक्‍नोलोजी के बोर्ड में सरकारी मनोनीत सदस्‍य थे । अब आप राष्‍ट्रीय पन बिजली विद्युत निगम, सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड, खेलांगचू हाईड्रो इलैक्ट्रीकल कार्पोरेशन, भूटान में बोर्ड के सरकारी मनोनीत सदस्‍य है । आपने जापान में 1997 में आयोजित कर सेमिनार में भारत का दो बार प्रतिनिधित्‍व किया तथा 2010 में अंतर्राष्‍ट्रीय सेवा कांग्रेस में भारतीय शिष्‍ट मण्‍डल के सदस्‍य रहे ।

     

  • श्री पी.के. सक्सेना

    श्री पी.के. सक्सेनासदस्‍य, भारत सरकार

    श्री पी.के. सक्सेना

    श्री पी.के. सक्सेना

    सदस्‍य, भारत सरकार

    आयुक्त (सिंधु), भारत सरकार जल संसाधन मंत्रालय, नई दिल्ली।

    श्री पी.के. सक्सेना, जबलपुर विश्वविद्यालय से सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं और केन्द्रीय जल अभियांत्रिकी सेवा के अधिकारी हैं। इन्होंने वर्ष 1989 में केन्द्रीय जल आयोग में कार्य ग्रहण किया। इन्हें जल संसाधन परियोजनाओं की योजना एवं डिज़ाइन में 27 वर्ष से अधिक का अनुभव प्राप्त है जिनमें से ज्यादातर जल विद्युत क्षेत्र की परियोजनाएं हैं। ये भारत, नेपाल और अफगानिस्तान में अनेक प्रतिष्ठित जल विद्युत परियोजनाओं की डिज़ाइन से जुड़े रहे हैं। ये देश में स्नो हाइड्रोलोजी के क्षेत्र तथा जल संसाधन परियोजनाओं की निगरानी एवं मूल्यांकन से भी संबद्ध रहे हैं।

    ये एक दशक से भी अधिक अवधि से सिंधु जल समझौता 1960 से संबंधित मामलों से भी जुड़े रहे हैं और इन्होंने स्थायी सिंधु आयोग की विभिन्न बैठकों और दौरों में भारतीय पक्ष का प्रतिनिधित्व किया है।

    इन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विभिन्न मंचों पर लगभग 23 शोध पत्र प्रस्तुत किए हैं।

    इस समय ये आयुक्त (सिंधु), जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास एवं गंगा पुनरुद्धार के रूप में कार्यरत हैं और स्थायी सिंधु आयोग सहित भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौता 1960 तथा पंजाब, हरियाणा, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश तथा राजस्थान के जल संसाधन विकास के अन्तर्राज्यीय पहलुओं से संबंधित कार्य देख रहे हैं।

  • श्री सर्वजीत सिंह

    श्री सर्वजीत सिंहसदस्‍य, पंजाब

    श्री सर्वजीत सिंह

    श्री सर्वजीत सिंह

    सदस्‍य, पंजाब

       प्रधान सचिव, पंजाब सरकार,  जल संसाधन विभाग, चंडीगढ़। 

    1. सहायक आयुक्‍त (Under training) पटियाला                                   13.06.1993           11.08.1994
    2. एस.डी.ओ. (सिविल), खन्‍ना                                                             17.08.1994           24.08.1994
    3. एस.डी.ओ. (सिविल), आनंदपुर साहिब                                              30.08.1994           16.01.1996
    4. अतिरिक्‍त उपायुक्‍त, रोपड़                                                              17.01.1996           Not avaialble
    5. अतिरिक्‍त उपायुक्‍त (विकास), लुधियाना                                          Not available        Not avaialble
    6. अतिरिक्‍त आयुक्‍त,  नगर निगम, लुधियाना                                      02.06.1999           27.10.1999
    7. अतिरिक्‍त आयुक्‍त, उत्‍पाद एवं कराधान पटियाला                              28.10.1999           16.04.2001
    8. उपायुक्‍त, संगरूर                                                                            16.04.2001           21.07.2004
    9. निदेशक, ग्रामीण विकास एवं पंचायत, पंजाब                                      28.07.2004           09.06.2006
    10. 10. वरिष्‍ठ क्षेत्रीय प्रबंधक,एफ सी आई, पंजाब क्षेत्र, चण्‍डीगढ़                 09.06.2006          Not available
    11. प्रबंन्‍ध निदेश्‍क,  मार्कफैड                                                                  06.07.2009           Not avaialble
    12. मुख्‍य प्रशासक, पुडा, मोहाली                                                             20.05.2010           Not avaialble
    13. मुख्‍य प्रशासक, गमाडा, मोहाली                                                         07.02.2011           23.07.2012
    14. सचिव, राजस्‍व                                                                                24.07.2012           Not avaialble
    15. सचिव, कार्मिक                                                                               22.04.2013           14.08.2013
    16. सचिव, राजस्‍व                                                                                14.08.2013           29.01.2014
    17. वित्‍त सचिव, चण्‍डीगढ़ प्रशासन                                                         30.01.2014            Not avaialble
    18. प्रधान सचिव, सिंचाई                                                                        01.03.2017           24.03.2017
    19. प्रधान सचिव, ट्रांसपोर्ट                                                                      24.03.2017           01.10.2018
    20. प्रधान सचिव, जल संसाधन विभाग                                                    01.10.2018           Till now

      

     

     

  • श्री अनुराग रस्‍तोगी

    श्री अनुराग रस्‍तोगीसदस्य, हरियाणा

    श्री अनुराग रस्‍तोगी

    श्री अनुराग रस्‍तोगी

    सदस्य, हरियाणा
     ‍प्रधान सचिव, हरियाणा सरकार, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग, हरियाणा,

    मुख्य सचिवालय, चण्डीगढ़

          जन्‍म तिथि     21.06.1965

          शैक्षण्कि योग्‍यता   बी.टैक. (मकैनीक्‍ल)

          मातृ भाषा    हिन्‍दी

          केडर/वर्ष     हरियाणा /1990

          महत्‍वपूर्ण पूर्व नियुक्‍तियां:-

          निदेशक  माध्‍यमिक शिक्षा  हरियाणा

          परियोजना निदेशक  हरियाणा प्राथमिक शिक्षा परियोजना परिषद  

          महानिदेशक  नगर और ग्राम योजना

     ‍     प्रधान सचिव,  ‍सिचाई विभाग, हरियाणा , उत्‍पाद शुल्‍क और कराधान ,विद्युत/ उर्जा , विकास एवं पंचायत विभाग

            

  • श्री नवीन महाजन

    श्री नवीन महाजनसदस्‍य, राजस्‍थान

    श्री नवीन महाजन

    श्री नवीन महाजन

    सदस्‍य, राजस्‍थान

    श्री नवीन महाजन, आईएएस, सचिव, जल संसाधन विभाग, इंदिरा गांधी नहर विभाग और सिंचित क्षेत्र  विकास ।

    इनका जन्‍म 13 नवम्बर, 1971 को जालंधर में हुआ । प्रारंभिक शिक्षा अपने पैतृक नगर से पूरी की और वे शैक्षणिक और पाठ्येतर गतिविधियां दोनों में उत्‍कृष्‍ठ थे । इन्‍होनें प्रतिष्ठित राष्‍ट्रीय प्रतिभा खोज परीक्षा, छात्रवृति जीती और दसवीं की सीबीएसई परीक्षा में औसंत 93.6% अंक प्राप्‍त करने के साथ साथ विज्ञान वर्ग में अखिल भारत में शीर्ष पर रहे । वह विद्यालय( एपीजे,स्कूल जालंधर) के हैड बॉय और विद्यालय की किक्रेट और वॉलीबाल टीम के कप्‍तान रहे । श्री महाजन ने राज्‍य एवं राष्‍ट्रीय स्‍तर की कई प्रश्‍नोतरी व वाद-विवाद प्रतियोगिताऍं जीती हैं ।

    श्री महाजन प्रतिष्ठित आईआईटी, जेईई और रूड़की विश्‍वविद्यालय प्रवेश परीक्षा में चयनित हो गए  थें । तथापि इन्‍होनें पंजाब इंजिनीयरिंग कॉलेज, चण्‍डीगढ़ में दाखिले को प्राथमिक्‍ता दी, इलैक्‍ट्रॉनिक और इलैक्ट्रिकल कम्‍युनिकेशन में शीर्ष स्‍थान प्राप्‍त करने के कारण इन्‍हें सीमेंस और टीसीएस ने उन्‍हें कैम्‍पस सलैक्‍शन के दौरान लाभप्रद पैकेज के लिए चुना, लेकिन इन्‍होनें प्रशासनिक सेवा के विकल्‍प को चुना और इन्‍होनें प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा में अखिल भारतीय  स्‍तर पर 22वॉं स्‍थान प्राप्‍त किया ।

    इन्‍होनें छ: जिलों में जिलाधीश और जिला मजिस्‍ट्रेट के रूप में कार्य किया और आपने लगभग दस वर्षों तक जिला प्रमुख के रूप में कार्य किया। इन्‍हें राज्‍य की राजधानी के जिला मजिस्‍ट्रेट और जिलाधीश के पद पर कार्य करने का सौभाग्‍य मिला और माननीय मुख्‍य मंत्री के गृह जिले (जोधपुर) के भी जिलाधीश एवं जिला मजिस्‍ट्रेट के रूप मेंर्यरत रहने के अलावा अजमेर, जोधपुर, चुरू, दौसा, स्‍वाईमाधोपुर के भी जिला मजिस्‍ट्रेट रहे ।

    इन्‍हें अजमेर में कार्यकाल के दौरान सर्वश्रेष्‍ठ कलैक्‍टर राज्‍य पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया गया और भारत के प्रधान मंत्री द्वारा इन्‍हें अजमेर में नरेगा में अग्रिणी कार्य के लिए राष्‍ट्रीय पुरस्‍कार से भी सम्‍मानित किया  गया । राज्‍य सरकार, नाबार्ड(NABARD) और राष्‍ट्रीय स्‍तर के जल विशेषज्ञों द्वारा इनके अत्‍याधिक शुष्‍क जिला चुरू में जल दोहन के ग्राम स्‍तर की पहल को व्‍यापक स्‍वीकारा गया।

           इन्‍होनें प्रतिष्ठित पदों जैसे आर.आई.आई.सी.ओ. के महानिदेशक, ए.डी.बी. वित्‍त पोषित शहरी इंफास्‍ट्रैचर कार्य के परियोजना निदेशक और राज्‍य बजट के वित्‍त सचिव पर कार्य किया जहां इनकी कार्यशैली शहरों के सुधार, निवेश और सरकारी खरीद में नई पहल का संचालन करने में सहायक सिद्ध हुई ।

           श्री महाजन खेल, संगीत और यात्रा के शौकीन हैं । आप महाविद्यालय के दिनों के दौरान पंजाब विश्‍वविद्यालय स्‍तर तक क्रिकेट खेले लेकिन अब अधिकतर टैनिस खेलते हैं और लॉन टैनिस में लगातार राज्‍य स्‍तर की प्रतियोगिताऍं जीती हैं । अखिल भारतीय सेवा प्रतियोगिता में टैनिस डब्‍लस (ओपन कैटेगरी) में राष्‍ट्रीय स्‍वर्ण भी जीता ।

  • श्री प्रबोध सक्‍सेना

    श्री प्रबोध सक्‍सेनासदस्य, हिमाचल प्रदेश

    श्री प्रबोध सक्‍सेना

    श्री प्रबोध सक्‍सेना

    सदस्य, हिमाचल प्रदेश

    प्रधान सचिव, हिमाचल  प्रदेश सरकार,

    बहुउद्देशीय परियोजना व विद्युत शहरी विभाग, नगर व ग्राम आयोजना एवं आवास विभाग ।

    भारतीय प्रशासनिक सेवा -1990 बैच

    अंतर्राष्ट्रीय कार्यकाल और तत्काल पिछला असाइनमैंट

    एशियाई विकास बैंक (2/2013 /2 / 2016) मनीला, फिलीपींस

    भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, लाओ पीडीआर, ताजिकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान के कार्यकारी निदेशक के वरिष्ठ सलाहकार ।

    जिम्मेदारियों में एडीबी प्रबंधन और बोर्ड के बीच के मुद्दों के पूरे आयाम पर कार्यकारी निदेशक और वैकल्पिक कार्यकारी निदेशक को सलाह देना शामिल है। निदेशक के सलाहकार यह भी सुनिश्चित करते हैं कि सभी निर्वाचन क्षेत्र के सदस्यों के हितों और चिंताओं को पर्याप्त रूप से व्यक्त और प्रतिनिधित्व किया गया है।

    भारत सरकार कार्यकाल

    आर्थिक सहायता विभाग, वित्त मंत्रालय, भारत सरकार

    आर्थिक मामलों के विभाग में मेरा पांच साल का कार्यकाल समृद्ध, पुरस्कृत और विशिष्ट रूप से विविध रहा है। मैं उन कुछ संयुक्त सचिवों में से एक हूं, जिन्हें द्विपक्षीय सहयोग से लेकर बहुपक्षीय विकासात्मक बैंकों और क्रेडिट की लाइनों से लेकर अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के शासन के मुद्दों तक विकास सहयोग की पूरी श्रृंखला से संबंधित प्रभागों की अध्यक्षता करने का अवसर मिला है।

    निदेशक के रूप में, मैंने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) शासन को लागू किया और द्विपक्षीय निवेश संवर्धन और संरक्षण समझौतों के मुख्य वार्ताकार के रूप में बाहरी भारतीय निवेश के हितों को भी सुरक्षित किया।

    संयुक्त सचिव (बहुपक्षीय संस्थान) 8 / 2012-1 / 2013

    विश्व बैंक समूह (अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय निगम सहित), अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक, अफ्रीकी विकास बैंक और कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष के साथ भारत सरकार के व्यवहार के लिए जिम्मेदार।

    प्रभाग की जिम्मेदारियों में इन संगठनों के अंतर्राष्ट्रीय प्रशासन के साथ-साथ भारत के भीतर इन संस्थानों के संचालन की निगरानी में भारत की भूमिका शामिल थी।

    बड़े पैमाने पर अनियमित निगरानी और समन्वयित वित् य उधारदाताओं, विशेष रूप से परियोजना की पहचान, परियोजनाओं के संचालन, परिचालन परियोजना और उनके सफल क्रियान्वयन में लगे हुए थे।

    संयुक्त सचिव (द्विपक्षीय सहयोग) 7 / 2010–7 / 2012

    यूरोपीय आयोग, फ्रांस, जर्मनी, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे पात्र द्विपक्षीय भागीदारों के सभी विकासात्मक सहयोग मुद्दों के साथ नियमित रूप से जुड़े हुए हैं।

    जिम्मेदारी में ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, यूरोपियनियन, जापान, न्यूजीलैंड, नॉर्वे दक्षिण अफ्रीका, स्विट्जरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ आर्थिक और वित्तीय मुद्दों पर संस्थागत संवाद शामिल थे।

    दिलचस्प बात यह है कि, मैंने "दाता" के दूसरे हिस्से को पहना और दक्षिण-दक्षिण सहयोग के तहत हमारे रणनीतिक भागीदारों को क्रेडिट ऑफ लाइन (एलओसी) दिया।

    एक्सिम बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, विदेश मंत्रालय (एमईए) आदि के साथ नियमित रूप से समन्वित किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एलओसी को समय पर लागू किया जाए।

    द्विपक्षीय भागीदारों और अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा प्रस्तावित प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का प्रशासन नौकरी का दूसरा पहलू था।

    सहायता, लेखा और लेखा परीक्षा 9 / 2011-1 / 2012 के नियंत्रक

    देश की बाहरी सहायता के सभी आंदोलनों के डेटा और लेनदेन को बनाए रखने के लिए एक बैक ऑफिस के रूप में कार्य किया।

    संयुक्त सचिव (अवसंरचना और निवेश) 8 / 2011–9 / 2011

    उत्तरदायित्व में वित्तपोषण, विनियमन और सार्वजनिक निजी भागीदारी सहित पूरे अवसंरचना क्षेत्र में सभी नीतिगत मुद्दों की परीक्षा शामिल थी।

    विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (FIPB) में एफडीआई प्रस्तावों के प्रसंस्करण, परीक्षा और संचालन का पर्यवेक्षण करना।

    निदेशक विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड 3 / 2008–6 / 2010

    FIPB के सचिवालय कार्यों की सर्विसिंग के लिए जिम्मेदार। नौकरी की जिम्मेदारी में प्रस्ताव के अंत से अंत तक स्वीकृति पत्र जारी करने के लिए सुविधा केंद्र में इसका स्वागत शामिल है।

    यूएसपी को डेटलाइन के रिगर्स का मिलान करना था, सप्ताह के बाद सप्ताह। विदेशी निवेशकों के साथ भारत सरकार के इंटरफेस पर परिलक्षित रूप से इसके काम का महत्व।

    अनुप्रयोगों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग शुरू की और सार्वजनिक डोमेन में एफआईपीबी निर्णय पर एक संकलन जारी किया, जिसे उद्योग, कानून फर्मों और मीडिया द्वारा बहुत अच्छी तरह से प्राप्त और सराहा गया।

    निदेशक निवेश 3 / 2008-6 / 2010

    समझौते के लागू होने के समय तक पूर्व वार्ता चरण से द्विपक्षीय निवेश संवर्धन और संरक्षण समझौतों के लिए जिम्मेदार।

     नौकरी में बातचीत, कानून की विशेषज्ञता और कूटनीतिक बारीकियों की समझ के कौशल शामिल थे।

    एमईए के साथ निरंतर संवाद और समझौतों की प्रारंभिक परिपक्वता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी  थी ।

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